मेघनाद साहा
मेघनाद साहा एक खगोलशास्त्री थे और उन्होंने साहा समीकरण का सिद्धांत दिया था जो तारों की गति, उम्र, उनमें रासायनिक प्रक्रियाओं और दूसरी गणनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ. मेघनाथ साहा काफी गरीब पृष्ठभूमि से आते थे. अपनी प्राइमरी की पढ़ाई के लिए उन्हें घर से दूर जाना पड़ा. उनके पास उस जमाने में भी रहने, खाने और पढ़ाई के पैसे नहीं थे. लेकिन उनके मन में पढ़ाई की ऐसी लगन थी कि वह किसी के घर पर रहकर जानवरों को चारा देते, नहलाते और दूध निकालते. बचे हुए समय में पढ़ाई करते. मेधावी होने की वजह से उन्हें स्कूल में छात्रवृत्ति मिल जाती थी, जिससे उनका पढ़ाई पर खर्च नहीं होता. तब ढाका भारत में हुआ करता था. वह पांचवीं कक्षा में पूरे ढाका जिले में प्रथम आए और उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिल गई. एक दिन उनके स्कूल में गवर्नर वैमफील्ड फुलर का दौरा तय हुआ. सभी विद्यार्थियों को सख्त ताकीद की गई कि कपड़े धोकर, साफ होकर यूनिफॉर्म में आएं. फुलर आया तो उसने देखा कि मेघनाद के पैरों में जूते नहीं हैं. गरीब मेघनाद के जूते न पहनने को गवर्नर का अपमान समझा गया. हकीकत यह थी कि मेघनाद के पास जूते ही नहीं थे. उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया और छात्रवृत्ति भी रोक दी गई. लेकिन हुनर अपना रास्ता तलाश ही लेता है. मेघनाद का तब तक इतना नाम हो चुका था कि उन्हें दूसरे स्कूल ने अपने यहां पढ़ने का न्योता दे दिया और साथ में छात्रवृत्ति भी दी. साहा बाद में सुभाष चंद्र बोस के भी करीब आए.