भारतीय रिजर्व बैंक ने 100 रुपये का नया नोट जारी करने का फैसला किया है, जो कि हल्के बैंगनी रंग का है और उसके पीछे गुजरात के पाटन में सरस्वती नदी के किनारे स्थित बावड़ी 'रानी की वाव' का चित्रांकन है. लेकिन बैंक को नए नोट छापने में करोड़ों रुपये खर्च करना पड़ेंगे और इससे पहले भी नोट छापने में सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है.
इस नोट का साइज 66 एमएम गुणा 142 एमएम होगा, जिसके लिए एटीएम भी अलग से
रीकैलिब्रेट करने होंगे. एटीएम ऑपरेशन इंडस्ट्री के मुताबिक, नए नोटों की
वजह से देश के 2.4 लाख मशीनों को रीकैलिब्रेट करने पर 100 करोड़ रुपये खर्च
होंगे.
खास बात यह है कि 100 के नोट पर ज्यादा खर्चा होगा, क्योंकि इसकी साइज पहले वाले नोटों से अलग है और इसके लिए अलग व्यवस्था करनी होगी. वहीं इस पर होने वाले प्रिटिंग का खर्चा अलग है.
हाल ही में 200 रुपये का नोट जारी किया गया था और इसके लिए भी एटीएम को रैकैलिब्रेट करना पड़ा. इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है 200 रुपये के नोट के लिए सभी एटीएम को रीकैलिब्रेट करने का काम खत्म भी नहीं हुआ है कि नया नोट आ गया है.
बता दें कि सरकार नोटबंदी के बाद से चार नए नोट जारी किए गए हैं, जिसमें 10, 50, 500, 2000 रुपये का नोट शामिल है. जिसके बाद से रिजर्व बैंक ने नए नोटों पर जून 2016 से जून 2017 के बीच 7965 करोड़ रुपये का खर्चा किया, जो कि 2015 साल के मुकाबले दोगुना था. गौरतलब है कि 2015-16 में 3420 करोड़ रुपये खर्चा हुआ था.
2016 में एक आरटीआई के जवाब में सामने आया था कि 2000 रुपये के एक नोट पर 3 रुपये 54 पैसे और 500 रुपये के नोट पर 3.09 रुपय खर्चा हुआ था. जिससे आरबीआई को 54 फीसदी का कम फायदा हुआ था.
जनवरी 2018 तक आरबीआई 200 रुपये के नोट की छपाई पर 522 करोड़, 2000 के नोट पर 1293 करोड़, 500 रुपये के नोट पर 4968 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. इसके अलावा एटीएम में इनकी व्यवस्था पर भी अलग से खर्चा हुआ है.