तेलंगाना में वुमन सेफ्टी विंग की इनचार्ज IPS स्वाति लकड़ा गुरुवार को ट्विटर पर ट्रेंड कर रही हैं. उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा है. इसके पीछे की वजह ये है कि उन्हें तेलंगाना सरकार ने एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस के पद पर प्रमोट किया गया है. बता दें कि अपने काम से तेलंगाना में महिला सुरक्षा पर काम करने वाली इस तेजतर्रार अफसर को देखकर मनचलों के पसीने छूटते हैं. वो महिला हिंसा जैसे रेप छेड़खानी आदि को लेकर बहुत सख्त हैं. आइए जानें- IPS स्वाति लकड़ा के बारे में. तेलंगाना में कैसी है उनकी छवि.
1995 बैच की आईपीएस अफसर स्वाति की 12वीं तक की पढ़ाई लॉरेटो कॉन्वेंट रांची से हुई. उनके पिता साउथ इस्टर्न रेलवे में सिविल इंजीनियर के पद पर तैनात रहे हैं. बचपन से पढ़ाई में तेज स्वाति बेहद गंभीर स्वभाव की रही हैं. 12वीं पास करके स्वाति ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमन से राजनीति विज्ञान विषय से स्नातक किया.
बचपन में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली स्वाति को जब सिविल सर्विसेज के बारे में पता चला तो उन्होंने इसे अपना लक्ष्य बना लिया. फिर दिल्ली में रहकर ही तैयारी की और अपना लक्ष्य पा लिया. वो सबसे ज्यादा चर्चा में तब आईं जब उन्होंने तेलंगाना की वुमन सेफ्टी विंग का चार्ज संभाला. यहां उन्होंने शी टीम और भरोसा सेंटर बनाया.
SHE टीम तेलंगाना पुलिस की एक विंग है, जो पांच लोगों के छोटे-छोटे समूहों में काम करती है. ये टीम मुख्य रूप से हैदराबाद के व्यस्त सार्वजनिक क्षेत्रों में सक्रिय रहती है. टीम का काम मनचलों से सख्ती से निपटना है. अगर मौके पर किसी को महिलाओं के साथ छेड़खानी या पीछा करते पाया जाता है तो टीम तत्काल सक्रिय हो जाती है.
SHE की शुरुआत 24 अक्टूबर 2014 को हुई थी. इस कैंपेन का मकसद लड़कियों और महिलाओं को सुरक्षा देना है. ये मुहिम रंग लाई और घटनाओं में काफी कमी आई. इससे महिलाओं में भी आत्मविश्वास
पैदा हुआ. महिलाओं के लिए हैदराबाद को सुरक्षित शहर बनाने की कोशिश रंग लाई.
गुरुवार को ट्विटर पर स्वाति ने दी प्रमोशन की जानकारी, यहां देखें
2016 में यौन हिंसा की शिकार महिलाओं और बच्चों के लिए एक-स्टॉप सपोर्ट सेंटर भरोसा भी लॉन्च किया. इस केंद्र के जरिये बच्चों को यौन अपराधों से बचाने और बाल शोषण के मामलों में मदद का काम करता है. ऐसे केस जब भी आते हैं तो कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं, जैसे- कोर्ट में जाना पड़ता है, पीड़ित का स्टेटमेंट रिकॉर्ड करना होता है, पीड़ित को अस्पताल ले जाना होता है. तो ऐसी स्थिति में पीड़ित की मानसिक अवस्था का भी ध्यान रखना होता है.
इसके साथ ही दिसंबर 2017 में POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) एक्ट के तहत चाइल्ड-फ्रेंडली कोर्ट बनाया गया. ये वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर का चाइल्ड-फ्रेंडली कोर्ट बनाया गया है. ये तेलंगाना में मुख्य कोर्ट के बाहर है. इसकी खासियत है कि यहां ये पूरा ध्यान रखा जाता है कि पीड़ित को आरोपी के सामने न लाया जाए. इसके लिये एक वन-वे मिरर भी है. अगर बच्चा कोर्ट में बैठा है तो आरोपी वन-वे मिरर के बाहर बैठेगा.
एक सफल अफसर के साथ साथ वो दो बच्चों की मां और पत्नी की भूमिका में भी उतनी ही सफल हैं. स्वाति अपने जीवन की सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं. स्वाति कहती हैं कि मेरे पिता की नौकरी में ट्रांसफर होते रहते थे, ऐसे में हमारी पढ़ाई का ध्यान मां रखती थीं. वो महिलाओं की सुरक्षा को उनके विकास के लिए सबसे बड़ी जरूरत मानती हैं.