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रिजल्ट

CBSE 10,12 Result 2021: मार्कशीट या ग्रेड, कैसे तैयार होगा 12वीं का पासिंग क्राइटेरिया?

प्रतीकात्मक फोटो (Getty)
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कोरोना संक्रमण के गंभीर खतरों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने दसवीं और 12वीं के बोर्ड एग्जाम कैंसिल कर दिए थे. अब सबसे बड़ी चुनौती इन दोनों कक्षाओं के छात्रों का रिजल्ट मार्कशीट के रूप में तैयार करना है. सीबीएसई बोर्ड ने 10वीं के लिए असेसमेंट पॉलिसी एक जून को ही जारी कर दी थी, अब 12वीं के असेसमेंट के लिए 13 सदस्यीय सम‍ित‍ि काम कर रही है. ये कमेटी असेसमेंट में किस तरह का मार्किंग क्राइटेरिया रख सकती है, इसे लेकर कई प्वाइंट्स सामने आ रहे हैं. आइए जानें- वो क्या हैं. (इनपुट्स: अमनदीप शुक्ला)

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कहा जा रहा है कि बारहवीं कक्षा के छात्र जिनकी अंतिम परीक्षा रद्द कर दी गई थी, उन्हें पहले स्कूलों द्वारा आयोजित प्री-बोर्ड में उनके प्रदर्शन और दसवीं और ग्यारहवीं कक्षा में उनके अंकों के आधार पर भी आंका जा सकता है. शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव विपिन कुमार की अध्यक्षता में सीबीएसई द्वारा गठित एक समिति से मिली जानकारी के अनुसार परिणाम तय करने में एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में पिछली परीक्षाओं के प्रदर्शन को रखा जा सकता है. 

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गौरतलब है कि 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए जो मानदंड सामने आ सकते हैं, उनमें कई उन मानदंडों में समानताएं हो सकती हैं, जिनके आधार पर दसवीं कक्षा के छात्रों का असेसमेंट किया जाएगा. सीबीएसई ने पिछले महीने लगभग समान स्थिति में दसवीं कक्षा के छात्रों को अंक देने के लिए 17 पन्नों का एक सर्कुलर जारी किया था, इसके आधार पर दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए अंक मोटे तौर पर दो व्यापक तरीकों के आधार पर दिए जाएंगे. 
 

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इसमें दसवीं के रिजल्ट में पिछली परीक्षाओं और कक्षाओं में छात्र का प्रदर्शन और साथ ही पिछली बोर्ड परीक्षाओं में स्कूल का प्रदर्शन भी शामिल किया है. इसमें अलावा दसवीं कक्षा के लिए, बोर्ड ने एक ही समय में अंक निर्धारित करने में सतर्क रहने की कोशिश की थी. दसवीं कक्षा के लिए 1 मई को जारी सर्कुलर के अनुसार, बारहवीं कक्षा की परीक्षा रद्द होने से ठीक एक महीने पहले, स्कूल प्राचार्यों और शिक्षकों के साथ समितियों को अंक आवंटित करने के लिए कहेंगे. 

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दसवीं के मूल्यांकन के लिए ये निर्णय लिया गया था कि रिजल्ट तैयार करते वक्त समय-समय पर होने वाली परीक्षाओं, अर्धवार्षिक परीक्षाओं और प्री-बोर्ड परीक्षाओं को वेटेज दिया जाएगा.  हालांकि, इस प्रोसेस के लिए यह भी कहा गया कि अलग-अलग स्कूलों में अलग-अलग मार्किंग मानक हो सकते हैं. इसलिए किसी भी तरह के विषम परिणामों की संभावना को खत्म करने के लिए, सीबीएसई ने स्कूलों को पिछली बोर्ड परीक्षाओं में अपने स्वयं के प्रदर्शन के आधार पर अपने परिणामों को मॉडरेट करने के लिए कहा है. 

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स्कूल की इमेज भी डालेगी असर 
दसवीं के रिजल्ट में स्कूल का प्रदर्शन भी मायने रखता है. बोर्ड ने कहा है कि स्कूलों को अपने पिछले तीन वर्षों के प्रदर्शन को देखने और उस वर्ष को चुनने के लिए कहा गया है जब उन्होंने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था.  इस वर्ष को संदर्भ बिंदु के रूप में उपयोग किया जाएगा. उदाहरण के लिए, यदि किसी स्कूल के छात्रों ने संदर्भ वर्ष में औसतन 78% अंक प्राप्त किए हैं, तो प्रदर्शन उनके मूल्यांकन के लिए संदर्भ बिंदु होगा. 

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CBSE ने विशिष्ट परिस्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न स्कूलों को लचीलापन दिया है. हालांकि, स्कूलों को रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए भी कहा गया है, इसके जरिये सीबीएसई यह भी सत्यापित करेगा कि उन्होंने प्रक्रियाओं का ठीक अनुपालन किया है. इसी तरह कहा जा रहा है कि बारहवीं कक्षा के मानदंड में दसवीं कक्षा के साथ कई समानताएं हो सकती हैं. उम्मीद की जा रही है कि बोर्ड जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल करेगा जिसमें उसे लिए गए फैसले से अवगत कराया जाएगा. 

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इससे पहले, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने हालांकि कहा था कि दसवीं कक्षा का टेम्प्लेट "सहायक" होगा, लेकिन यह मान लेना समय से पहले होगा कि उसी मॉडल को कॉपी और पेस्ट किया जाएगा. सीबीएसई ने कहा है कि 12वीं के क्राइटेरिया में कई बदलाव हो सकते हैं जोक‍ि दसवीं से एकदम अलग होंगे. 

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सीबीएसई की 12वीं कक्षा का रिजल्ट तैयार करने के लिए नंबर देने का पैमाना 16 और 17 जून तक तय कर लिया जाएगा. सूत्रों के अनुसार सीबीएसई की कमेटी इस नंबर देने के पैमाने को तय करने के लिए काम कर रही है और इसे अंतिम रूप देने में जुटी है. फिलहाल बोर्ड को सीबीएसई को कक्षा 12 के ऑप्शनल असेसमेंट के लिए स्कूलों से अलग-अगल सुझाव मिल रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि छात्रों को मार्क के बजाय इस साल ग्रेड दिया जाए. बारहवीं के रिजल्ट के लिए कहा जा रहा है कि इसमें प्री बोर्ड, 10वीं और 11वीं के नंबर जोड़कर इसे तैयार किया जा रहा है. 

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