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पिता का 1973 में टूट गया था IAS बनने का सपना, बेटी ने डॉक्टरी छोड़ की UPSC की तैयारी, पाई 53वीं रैंक

आपने ऐसी तमाम कहानियां सुनी होंगी जिसमें बेटे अपने पिता का सपना पूरा करते हैं. लेकिन अब समाज की बदलती सोच ने बेटियों को भी वो मौके दिए हैं जब वो भी अपने पिता का सपना पूरा करने में पीछे नहीं रहतीं. मुद्रा गैरोला भी इसकी मिसाल हैं, जानिए- इनकी कहानी.

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यूपीएससी में मुद्रा गैरोला ने हासिल की 53वीं रैंक
यूपीएससी में मुद्रा गैरोला ने हासिल की 53वीं रैंक

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने मंगलवार, 23 मई 2023 को UPSC सिविल सर्विसेज 2022 का रिजल्ट जारी किया था. उत्तराखंड की मुद्रा गैरोला ने 53वीं रैंक हासिल की है. कर्णप्रयाग की रहने वाली मुद्रा की कहानी तमाम विजेताओं से काफी अलग है. मुद्रा ने इस परीक्षा में सफलता पाकर अपने सपने के साथ साथ अपने पापा का भी 50 साल पुराना सपना पूरा किया है. 

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मुद्रा ने इससे पहले भी UPSC 2021 परीक्षा में 165 वीं रैंक हासिल करके मुद्रा ने आईपीएस कैडर हासिल किया था. फिलहाल वो हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल पुलिस एकेडमी में IPS की ट्रेनिंग कर रही हैं. इसी के साथ उन्होंने तैयारी जारी रखी और साल 2022 की परीक्षा में 53वीं रैंक लाकर पापा का सपना पूरा कर दिया. 

पिता को बेटी पर गर्व 
आजतक से बात करते हुए मुद्रा गैरोला के पिता अरुण गैरोला गर्व से कहते हैं कि मेरी बेटी बचपन से ही टॉपर रही है. मुद्रा ने 10वीं में 96 प्रतिशत व 12वीं क्लास में 97 प्रतिशत नंबर स्कोर किए थे. स्कूल खत्म करने के बाद मुद्रा ने मुंबई से डेन्टल की पढ़ाई की. BDS में भी मुद्रा गोल्ड मेडलिस्ट रहीं. डिग्री पूरी करने के बाद वो दिल्ली आईं और MDS में एडमिशन ले लिया. इसी बीच उन्होंने अपना ध्यान UPSC की तरफ लगाया और डॉक्टरी छोड़कर इसकी तैयारी शुरू की.

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चौथे अटेम्प्ट में पाई 53वीं रैंक 
UPSC की 2018 परीक्षा में मुद्रा इंटरव्यू तक पहुंची लेकिन फाइनल सेलेक्शन नहीं हो पाया. फिर साल 2019 के अटेम्प्ट में मुद्रा ने फिर से इंटरव्यू दिया. इस बार भी सफल नहीं हो सकीं. मुद्रा 2020 की UPSC सिविल सर्विसेज एग्जाम में मेंस की स्टेज तक पहुंची. फाइनली साल 2021 की परीक्षा में मुद्रा ने 165 वीं रैंक हासिल की. वो IPS बनी. इस बार उनकी रैंक काफी अच्छी आई. संभवत: इस बार उन्हें मनपसंद सर्विस और कैडर दोनों मिल जाएं.

50 साल पहले पिता ने दिया था एग्जाम 
मुद्रा के पिता अरुण गैरोला बताते हैं कि उनका सपना था कि उनकी बेटी IAS बने. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मुद्रा के पिता अरुण भी सिविल सेवा में जाना चाहते थे. अरुण ने साल 1973 में UPSC की परीक्षा दी थी. उस वक्त वो इंटरव्यू में बाहर हो गए थे. अरुण ने 1974 में फिर से परीक्षा दी. लेकिन बीमारी के कारण वो इंटरव्यू नहीं दे पाए. अरुण कहते हैं कि उनकी बेटी ने उनका सपना पूरा किया है.

यूपीएससी सिविल सर्विस 2022 परीक्षा में इशिता किशोर (रोल नंबर 5809986) ने पूरे देश में पहला स्थान पाया है. उन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध के साथ परीक्षा पास की है. उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया है.

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