Rajasthan Board Toppers Success Story: पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक समय ऐसा था जब बेटों की अपेक्षा बेटियों को कम पढ़ाया जाता था लेकिन अब माता-पिता बेटियों को भी पूरे मन से पढ़ा-लिखा रहे हैं. बाड़मेर की बेटी निकिता चौधरी और नरपत कुमार ने आरबीएसई 10वीं बोर्ड में 99.00% प्रतिशत अंक हासिल कर बाड़मेर जिले में टॉप किया है. दोनों के परिजन बच्चों की इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं. निकिता का सपना डॉक्टर बनने का है तो वहीं, नरपत कुमार सिविल सर्विस में जाकर गरीब और मध्यम वर्ग की सेवा करना चाहते हैं.
टॉपर की मां ने कहा- आज के समय में बेटा-बेटी सब बराबर
निकिता दो बहनों में बड़ी हैं. निकिता के पिता धर्माराम बाड़मेर के एक कॉलेज में लेक्चरर हैं तो मां मगी देवी फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में रेंजर हैं. माता-पिता दोनों सरकारी नौकरी में होने के कारण दोनों बेटियों को कम ही वक्त दे पाते हैं. लेकिन, अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन के साथ बच्चों की देखभाल और खाने-पीने से लगाकर उनको समय देने की कोशिश करते हैं. निकिता के माता पिता ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि इतना समय तो नहीं मिलता लेकिन, बच्चों को समय देने की कोशिश करते हैं. एक समय ऐसा था जब लोग बेटों को महत्व देते थे लेकिन, आज के समय में बेटा और बेटी दोनों बराबर हैं. बेटियां बेटों से कम नहीं हैं.
नीट क्लियर करना चाहती हैं निकिता
10th में 99 फीसदी अंक हासिल करने वाली निकिता चौधरी का सपना डॉक्टर बनने का है. निकिता कहती हैं कि रिजल्ट आने की जैसे ही घोषणा हुई तो पिछले 24 घंटे थोड़े मुश्किल गुजरे. 98 फीसदी अंक लाने का अनुमान था लेकिन, 99 फीसदी अंक आए. ये मेरे लिए खुशी की बात है. अब मैं अच्छी रैंक के साथ नीट क्लियर करना चाहती हूं. उसके बाद ही कुछ तय करूंगी कि डॉक्टर बनना है या सिविल सर्विसेज में जाना है. निकिता अपने इस मुकाम का श्रेय गुरुजनों और माता -पिता को देती हैं. निकिता का कहना है कि सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद उसके माता पिता ने उसके लिए समय निकाला और उसे मोटिवेट कर इस उपलब्धि तक पहुंचाया.
नरपत कुमार के भी 99 प्रतिशत
बाड़मेर में नरपत कुमार ने 99% प्रतिशत अंकों के साथ बाड़मेर में टॉप किया है. नरपत के पिता किसान हैं माता गृहिणी हैं. नरपत कुमार ने हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की और मोबाइल से दूरी बनाकर अपने लक्ष्य को साधे रखा. नरपत का सपना सिविल सर्विस में जाकर लोगों की सेवा करना है. नरपत ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय पहले अपने माता -पिता और उसके बाद गुरुजनों को दिया है।.नरपत का कहना है कि विकट परिस्थितियों के बाद भी मेरे माता -पिता ने मुझे पढ़ाया. यही वजह है कि मैंने मेहनत से ये मुकाम हासिल किया है.