UPSC ने मंगलवार को सिविल सेवा परीक्षा 2022 के रिजल्ट जारी कर दिए. इस बार के रिजल्ट ने पुराने ट्रेंड को तोड़कर नये मानक गढ़े हैं. इस बार रिजल्ट में मेडिकल इंजीनियरिंग से ज्यादा डीयू और जेएनयू से पढ़े कैंडीडेट्स का दबदबा दिख रहा है. वहीं टॉप 20 में जिस तरह 12 लड़कियों ने अपनी जगह बनाई है, उससे साफ है कि आने वाले वक्त में नौकरशाही में लड़कियों का अपना स्थान होगा.
बता दें कि पिछले कई सालों इंजीनियरिंग खास तौर पर IIT के छात्रों का रिजल्ट में वर्चस्व रहता था. अगर टॉप 4 की बात करें तो इसमें पहले, दूसरे और चौथे नंबर के तीनों उम्मीदवार दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से पढ़े हैं. इनमें से सिर्फ एक कैंडिडेट IIT से हैं.
वापस लौटा पुराना ट्रेंड
इससे पहले करीब 30 साल पहले भी यूपीएससी परीक्षाओं में विश्वविद्यालय से शिक्षित छात्रों का दबदबा रहता था. तब जवाहर लाल यूनिवर्सिटी, पटना यूनिवर्सिटी और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का आईएएस देने वाले छात्रों में नाम गिना जाता था. धीरे धीरे ये चलन एकदम आउट होता जा रहा था. अब रिजल्ट में मेडिकलि और इंजीनियरिंग छात्रों का दबदबा रहने लगा था. लेकिन इस बार के रिजल्ट में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने टॉप फोर में परचम लहराकर साबित कर दिया है कि यूनिवर्सिटी की शिक्षा व्यवस्था भी यूपीएससी बनाने में पीछे नहीं है.
इस साल की नंबर वन यूपीएससी टॉपर इशिता किशोर श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से, गरिमा लोहिया किरोड़ीमल कॉलेज (KMC) से और स्मृति मिश्रा मिरांडा हाउस डीयू से पढ़ी हैं. ये तीनों टॉप 4 में हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने इस पर काफी हर्ष जताया है. वहीं टॉप फाइव में शामिल उमा हरित एन IIT हैदराबाद से पढ़ी हैं. इस तरह देखा जाए तो टॉप फाइव में से तीन डीयू से हैं. इसकी सबसे खास बात यह है कि टॉप 4 में लड़कियां हैं.
इंजीनियर्स ही बन रहे थे आईएएस
तीन साल पहले तक यूपीएससी रिजल्ट में तो करीब 60% इंजीनियरिंग के छात्र यूपीएससी क्रैक करते थे. इसमें बड़ी संख्या IIT के छात्रों की होती थी. अगर साल 2020 के यूपीएससी बैच की बात करें तो लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (LBSNAA) मसूरी में ट्रेनिंग के लिए गए 428 सिविल सेवा अधिकारियों में 245 इंजीनियर थे. यानी यूपीएससी निकालने वाले 57 फीसदी से ऊपर इंजीनियर छात्र थे. इनमें से आठ के पास इंजीनियरिंग के अलावा मैनेजमेंट बैकग्राउंड था. साल 2019 बैच में LBSNAA आए 325 सिविल सर्वेंट में से 58% से ज्यादा191 इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से थे. इसमें 10 सिविल सर्वेंट इंजीनियरिंग और एमबीए बैकग्राउंड से थे.