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UPSC Success Story: तीन उंगलियों से लिखी थी परीक्षा, गंभीर बीमारी से जूझ रही सारिका ने क्लियर किया UPSC

केरल के कोझीकोड की सारिका से यूपीएससी सीएसई 2023 परीक्षा पास कर ली है. सारिका को सेरेब्रल पाल्सी नामक बीमारी है, जिसमें शरीर की कई मासपेशियां काम करना बंद कर देती हैं. आइए सारिका की जर्नी के बारे में जानते हैं.

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UPSC AIR 922 Sarika
UPSC AIR 922 Sarika

UPSC AIR 922 Sarika Success Story: यूपीएससी देश की कठिनतम परीक्षाओं में से एक है, इस एग्जाम को क्लियर करने के लिए उम्मीदवार दिन रात एक कर देते हैं, इसके बावजूद चंद लोगों का सेलेक्शन हो पाता है. इस साल यूपीएससी की परीक्षा में एक हजार 16 कैंडिडेट्स का चयन हुआ है, जिसमें से एक केरल के कोझीकोड की सारिका ऐके भी हैं. इस परीक्षा को पास करने के लिए सारिका  का संघर्ष सिर्फ पढ़ाई तक ही सीमित नहीं था. उन्होंने अपनी बीमारी से लड़ाई लड़कर यूपीएससी क्लियर किया है.

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तीन उंगलियों से लिखकर दी मेन्स परीक्षा

सारिका केरल के कोझिकोड की मूल निवासी हैं. वह सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं. इस बीमारी ने सारिका को पूरी तरह जकड़ रखा है, उनकी सिर्फ तीन उंगलियां काम करती हैं और वह अपने दाहिने हाथ का इस्तेमाल भी नहीं कर पाती हैं. इतनी परेशानी होने के बावजूद भी सारिका ने पढ़ाई से कभी हार नहीं मानी. इन सीमाओं को पार करते हुए सारिका ने अब सिविल सेवा का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है. सारिका की उम्र सिर्फ 23 साल है, वह इस परीक्षा में 922 रैंक लेकर आईं हैं.

व्हीलचेयर पर बैठकर इंटरव्यू देने पहुंची थी सारिका

aajtak.in से बातचीत में सारिका ने बताया कि परीक्षा पास करने से काफी खुश हैं. उन्होंने कहा, "मैं इंटरव्यू में भाग लेने के लिए व्हील चेयर के साथ दिल्ली गई थी. कतर में काम करने वाले मेरे पिता मुख्य परीक्षा और मेरे इंटरव्यू के लिए मेरे साथ वहां आए थे. मेरे माता-पिता हमेशा बहुत सपोर्टिव रहे हैं. सारिका ने कहा कि उनके इंटरव्यू में मुख्य रूप से उनके ग्रेजुएशन विषय और उनके गृहनगर कोझिकोड के बारे में पूछा गया था. बता दें कि सारिका के पिता सशींद्रन कतर में काम करते हैं और उनकी मां का नाम राकिया है. सारिका की एक छोटी बहन भी है जो प्लस टू की छात्रा है.

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क्या है सेरेब्रल पाल्सी

सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क और मांसपेशियों से जुड़ी एक समस्या होती है. यह बीमारी बच्चों में पाई जाती है. शिशुओं में यह चार साल से कम उम्र के बच्चों में बीमारी देखने को मिलती है. ये बीमारी संक्रामक नहीं होती है. यह मस्तिष्क में हुए किसी डैमेज के कारण होती है जो आमतौर पर जन्म से पहले,जन्म के दौरान या उसके तुरंत बाद हो सकती है. इस बीमारी के लक्षण सभी में अलग-अलग नजर आते हैं. इस बीमारी में मांसपेशियों में खिंचाव होना, मांसपेशियों में सिकुड़न होना, शरीर का एक हिस्सा दूसरे के मुकाबले क उपयोग कर पाना, खाना खाने या निगलने में तकलीफ होना, बोलने में कठिनाई या शब्द काफी मुश्किल से निकल पाना, अत्यधिक लार का आना, घुटनों को अंदर की तरफ मोड़कर चलना, चलने में कठिनाई होना, मांसपेशियों में संतुलन की कमी जैसे लक्षण पाए जाते हैं.

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