देश की सांस्कृतिक राजधानी कही जाने वाले वाराणसी की प्रतिष्ठित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) से एक शर्मसार करने वाली खबर आई है. अमेरिकी मूल की आयुर्वेद डॉक्टर के साथ यूनिवर्सिटी कैंपस में गत 22 अप्रैल को छेड़छाड़ की घटना हुई. महिला के साथ पांच लोगों ने छेड़छाड़ की.
घटना को याद कर पीड़िता आज भी सिहर उठती है. बीएचयू से आयुर्वेद में पीएचडी कर रही पीड़िता ने कहा कि वह एक भयानक रात थी, मैं खुशकिस्मत रही वरना मैं भी दूसरी निर्भया बन सकती थी. हालांकि वाराणसी पुलिस के रवैये को देखें तो ऐसा लगता है जैसे कुछ हुआ ही नहीं. पुलिस ने इस घटना के बाद एफआईआर तक दर्ज नहीं की. आखिरकार आला अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद घटना के नौवें दिन जाकर मामले की एफआईआर दर्ज हो पाई.
इस मामले से पीडि़ता में काफी आक्रोश है. उन्होंने कहा, 'यह प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र है, क्या मोदी राज में यही होता है. महिलाओं के लिए स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. मैं अपने एक मित्र के जरिए वाराणसी पुलिस एसपी से मिली और अपनी शिकायत सुनाई. पुलिस ने इसके भी तीन दिन बाद एफआईआर दर्ज की.'
घटना के बारे में बताते हुए पीड़िता ने कहा, '22 अप्रैल को शाम पौने आठ बजे मुझ पर पांच लोगों ने हमला कर दिया. उन्होंने मेरा फोन छीन लिया. वो मुझसे रेप करना चाहते थे लेकिन मैंने सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग ली हुई है जिसकी वजह से वें अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए. इस दौरान मैं खुद भी घायल हो गई.'
इस घटना के बाद स्थानीय लंका पुलिस थाने ने पीड़िता की शिकायत दर्ज करने की बजाए उनसे चुप रहने को कहा. हालांकि लंका थाने के एसएचओ रमेश यादव कुछ और कहानी बयां करते हैं. उन्होंने कहा, 'इस मामले में देरी हमारी वजह से नहीं हुई है. हमने उचित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया था. पीड़िता ने बयान दर्ज कराने में देर की. उन्होंने एसपी साहब के कहने के बाद बयान दर्ज कराया.'