उत्तर प्रदेश में रामलला के मंदिर निर्माण की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. ये भी कहा जा रहा है कि जिस नाथ संप्रदाय के गुरु के हाथों राम मंदिर की नींव रखी गई, अब उसका निर्माण भी इसी पंत के महंत की सत्ता में ही संपन्न होगा.
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बता दें कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का योगी ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि हम दोनों पक्षों के साथ मिलकर समाधान निकालने के लिए तैयार हैं. यूपी सरकार हर संभव मदद के लिए तैयार है. इसके बाद इस मामले में एक बार फिर नया मोड़ आता दिख रहा है. नाथ संप्रदाय की पंरपरा को आगे बढ़ाते योगी आदित्यनाथ राम मंदिर के निर्माण को पूरा कर सकेंगे या नहीं, ये तो भविष्य तय करेगा पर इस संप्रदाय का राम मंदिर से पुराना नाता रहा है.
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के गुरु के गुरु ने जिस राम मंदिर की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई थी, लगता है वो काम अब योगी पूरा करेंगे.
वैसे तो, नाथ संप्रदाय के महंतों में आदित्यनाथ सर्वाधिक लोकप्रिय हैं. पर जिस रास्ते पर आज वे हैं, उसकी दिशा दिखाने का श्रेय महंत दिग्विजयनाथ को दिया जाता है. महंत दिग्विजयनाथ, आदित्यवनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ के गुरु थे. उन्होंने ही बाबरी मस्जिद के अंदर रामलला की मूर्ति स्थापित करने में अहम योगदान दिया था.
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कहा जाता है कि 1949 में दिग्विजयनाथ ने अखिल भारतीय रामायण महासभा ज्वाइन की. इसी महासभा ने बाबरी मस्जिद के सामने नौ दिवसीय रामचरितमानस का पाठ आयोजित किया, जिसके अंत में मस्जिद के भीतर भगवान राम और सीता की मूर्तियों को स्थापित किया गया. कुछ रिपोर्ट्स ये भी कहती हैं कि रामलला की मूर्ति को दिग्विजयनाथ ने ही स्थापित किया था.
दिग्विजयनाथ की चर्चा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि 1934 में जब वे नाथ संप्रदाय के महंत बने तो मंदिर कट्टर हिंदुत्व की राजनीति का केन्द्र बन गया था. उन्हें महात्मा गांधी की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था.