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देश में कोरोना के मामले तेज गति से फिर बढ़ने लगे हैं. जो मामले पहले रिकॉर्ड कम हो गए थे, एक बार फिर ट्रेंड बदल गया है. पिछले कई दिनों से मामले लगातार बढ़ रहे हैं. पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना के 3,641 मामले सामने आए हैं. इस समय दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश में केस सबसे ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. सोमवार को तो छत्तीसगढ़ के एक गर्ल्स हॉस्टल में कोरोना के एक साथ 19 संक्रमित मरीज मिल गए.
गर्ल्स हॉस्टल में कोरोना विस्फोट
बताया जा रहा है कि कन्या छात्रावास नगरी में एक साथ 11 छात्राएं कोविड पॉजिटिव निकलीं. जब बाकी छात्राओं की जांच की गई तो 8 और संक्रमित निकल गईं, ऐसे में कुल आंकड़ा 19 पहुंच गया. सभी छात्राओं को छात्रावास में ही क्वारंटाइन बनाकर आइसोलेट किया गया है. इस समय संक्रमित छात्राओं के संपर्क में आने वाली अन्य छात्राओं की कन्या छात्रावास में कोरोना जांच की जा रही है.
दिल्ली में कोरोना तेज, महाराष्ट्र में बढ़े मामले
वैसे एक तरफ छत्तीसगढ़ में कोरोना विस्फोट हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में भी कोरोना की रफ्तार डराने लगी है. पिछले 24 घंटे में राजधानी में कोरोना के 293 नए मामले सामने आए हैं, दो लोगों की मौत भी हुई है. बड़ी बात ये है कि संक्रमण दर इस समय दिल्ली में 18 फीसदी से ज्यादा हो गई है. यहां ये समझना जरूरी है कि 15 दिन में नए मामले 6 गुना बढ़ गए हैं, अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या 12 गुना बढ़ी है. अब दिल्ली में आंकड़े बढ़े हैं तो महाराष्ट्र में भी कोरोना की गति तेज है. पिछले 24 घंटे में राज्य में कोविड के 248 नए केस आए और एक शख्स की मौत हुई.
नया वैरिएंट, कितना खतरनाक?
इस समय कोरोना का एक नया वैरिएंट भी सामने आया है. जानकार मान रहे हैं कि ये ज्यादा खतरनाक तो नहीं है, लेकिन मामले जरूर बढ़ा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट में भी कहा गया है कि भारत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में नए COVID मामलों में अचानक उच्चतम आनुपातिक बढ़ोतरी देखी गई है. जबकि वैश्विक स्तर पर मामलों में लगभग 27 प्रतिशत की कमी आई है.
WHO के अनुसार, भारत में कोरोना के नए मामले में 437 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और इस वृद्धि के लिए नया ओमिक्रॉन वैरिएंट XBB.1.16 जिम्मेदार है. WHO के अनुसार, यह वैरिएंट BA.2.10.1 और BA.2.75 का रिकंबाइंड है. WHO ने अपनी यह टिप्पणी 27 फरवरी से लेकर 26 मार्च 2023 तक के कोविड आंकड़ों पर की है. वैश्विक स्वास्थ्य निकाय ने कहा है कि राहत की बात यह है कि इस दौरान अस्पताल में भर्ती होने या कोरोना से होने वाली मौतों में कोई वृद्धि नहीं देखी गई है.