दिल्ली सरकार ने यहां गैर मान्यताप्राप्त करीब 300 निजी स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की है क्योंकि ये स्कूल शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निर्धारित किए गए, न्यूनतम भूमि की जरूरत और गुणवत्ता संबंधी मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं.
अगर कोई स्कूल कानून में बताए गए मानदंडों और मानकों को पूरा नहीं करते हैं तो उन्हें तीन साल की अवधि में इनके लिए कदम उठाने चाहिए. शिक्षा निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस साल मई में शिक्षा निदेशालय, नगर निकाय और डीडीए को गैर मान्यताप्राप्त स्कूलों को बंद करने या स्थानांतरित करने का आदेश दिया था जो ऐसे परिसरों में चल रहे हैं जहां पढ़ने से बच्चों की सुरक्षा को खतरा है.
अधिकारी ने कहा कि निदेशालय ने तकरीबन 800 गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को अस्थायी मान्यता प्रदान की है लेकिन अभी भी करीब 300 स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं. ये वे स्कूल हैं जो भूमि की न्यूनतम जरूरत के मानक को पूरा नहीं करते. इन स्कूलों को बंद करने की फाइल प्रक्रिया में है. सरकार ने इस महीने के शुरू में एक परिपत्र जारी कर सभी अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों और गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों से उन भवनों के ढांचागत स्थिरता रिकॉर्ड, प्रमाण पत्र जमा कराने को कहा था जिनमें वे चल रहे हैं.
ऐसा करने में विफल रहने पर यह मान लिया जाएगा कि उनके पास ऐसा कोई दस्तावेज रिकॉर्ड नहीं है और बिना किसी नोटिस के ऐसे स्कूलों को बंद करने की कार्रवाई शुरु की जाएगी.
इननुट: भाषा