गाइडलाइन के मुताबिक देश के प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट आईआईटी में 32 फीसदी और आईआईएम में 22 फीसदी फैकल्टी की कमी है. इसी तरह एनआईटी में भी 25 फीसदी फैकल्टी कम हैं. देश के 16 आईआईआईटीज में से सिर्फ छह संस्थान ऐसे हैं, जहां टीचर-फैकल्टी का रेशियो 10:1 है.
इसी तरह आईआईटी हैदराबाद में 16:1 और आईआईटी जयपुर में 17:1 का रेशियो है.अगर इन संस्थानों को छोड़ दिया जाए तो देश के पुराने आईआईटीज में यह आंकड़ा बहुत ही खराब है, जो करीब 41 फीसदी फैकल्टी शॉर्टेज के बराबर है.
एक अंग्रेजी अखबार में दी गई रिपोर्ट के मुताबिक आईआईटी दिल्ली के पूर्व डायरेक्टर ने सरकार द्वारा नए आईआईटी संस्थानों की घोषणा को रोकने की अपील की है और कहा कि 'आईआईटी जैसे संस्थान पहले से ही फैकल्टी शॉर्टेज की मार झेल रहे हैं, ऐसे में नए संस्थानों की घोषणा से योग्य टीचर ढूढ़ना बहुत मुश्किल हो जाएगा.
उधर, इस बारे में आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर भास्कर राममूर्ति ने कहा कि हर साल देश के प्रत्येक आईआईटी संस्थानों में फैकल्टी रिक्रूट किए जा रहे हैं. लेकिन हर साल बहुत सारी फैकल्टी भी रिटायर होती है. मूर्ति ने कहा कि 'गाइडलाइन के मुताबिक़ आईआईटी संस्थानों में टीचर-फैकल्टी रेशो सही होने में अभी पांच साल का समय लगेगा.