'जब घर के सारे लोग घास काटने और मवेशियों के गोबर उठाने में खुश हैं तो तुम पढ़कर क्या करोगी? तुम परीक्षा में फर्स्ट डिविजन तो पास करोगी नहीं तो फिर इतनी ज्यादा मेहनत की क्या जरूरत है.', ये शब्द हैं बीना के ससुराल वालों के. पढ़ाई करने और परीक्षा देने के कारण ससुराल वालों ने बीना और उनकी महज एक साल की बच्ची को घर से निकाल दिया.
मधेपुरा जिले की रहनेवाली बीना परीक्षा सेंटर पर सबसे पहले पहुंच जाती हैं क्योंकि वह परीक्षा सेंटर पर ही रहती हैं. परीक्षा देने के कारण ससुरालवालों ने बीना और उसकी बच्ची को घर से बाहर निकाल दिया है. लेकिन मधेपुरा एडमिनिस्ट्रेशन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके रहने की व्यवस्था परीक्षा सेंटर पर ही कर दी.
परीक्षा सेंटर पर बीना सुबह 6 बजे जग जाती है. थोड़े समय के लिए परीक्षा की तैयारी करती हैं. उसके बाद अपनी बच्ची को खिलाती-पिलाती हैं. वहीं, कॉलेज के स्टाफ के सदस्य परीक्षा देते समय उनकी बच्ची को संभालते हैं. हालांकि बीना की मां अब परीक्षा सेंटर पर उनकी मदद करने के लिए आ गई हैं.
एक अखबार को दिए गए इंटरव्यू में बीना ने बताया कि पिछले साल वह दो विषयों में फेल हो गईं थीं. इसके बाद उन्होंने फिर से 10वीं परीक्षा देने का फैसला किया. तब से उन्होंने अपनी पढ़ाई पर काफी ध्यान दिया. उन्होंने बताया, 'मैं 10वीं में पहली श्रेणी से पास होना चाहती हूं. पिछले साल मैं दो सब्जेक्ट्स में फेल हो गई थी. इसके बाद मैंने पढ़ाई पर काफी ध्यान दिया है. मेरी बेटी जब पैदा हुई तो मैंने उसका नाम विद्या की देवी सरस्वती के नाम पर ही रखा. मैं चाहती हूं कि परिवार में सबसे पहले मैं मैट्रिक पास करूं.'
करीब दो साल पहले आलमनगर जिले की रहनेवाली बीना की शादी मधेपुरा में मुकेश साह से हुई थी. मुकेश पंजाब में मजदूरी का काम करते हैं. वह कहती हैं कि उनके पति को नहीं मालूम है कि उन्हें घर से निकाल दिया गया है. उनके पास कोई फोन नहीं होने के कारण और पति का फोन नंबर नहीं जानने के कारण वो अपने पति से बात भी नहीं कर पा रही हैं. बीना के ससुरालवाले मजदूरी और दूध बेचने का काम करते हैं. इनके खिलाफ बीना ने अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है.
बीना कहती हैं कि वो अपने मायके में भी रह सकतीं थीं लेकिन परीक्षा सेंटर से उनका घर 15 किलोमीटर की दूरी पर है. अपने ससुरवालों के व्यवहार के कारण बीना काफी दुखी हैं लेकिन परीक्षा सेंटर के अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ मिली अार्थिक मदद और रहने की व्यवस्था से उनकी समस्या काफी हद तक सुलझ गई है.
परीक्षा सेंटर के मजिस्ट्रेट कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि बीना पढ़ाई में कैसी हैं और वह परीक्षा पास कर पाएगी या नहीं. मगर बीना ने जिस तरह पढ़ाई के लिए संघर्ष किया है, वह काबिले तारीफ है और यही उसकी सबसे बड़ी सफलता है. बीना अब अपने पति के घर लौटने के बाद ही ससुराल वापस जाना चाहती हैं.