लगातार विवादों में घिरे बिन सचिवालय इम्तिहान को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, ये फैसला लाखों छात्रों को सुकून देने वाला है. इस परीक्षा में हेराफेरी के आरोप को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. बता दें कि छात्रों के जरिए दिए गए सबूत के आधार पर एसआईटी का गठन किया था. सोमवार को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री विजय रुपानी को सौंपी थी.
बिन सचिवालय इम्तिहान में गुजरात सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया है. गुजरात सरकार ने बिन सचिवालय एग्जाम पर बनाई एसआईटी की रिपोर्ट के बाद इसे रद्द करने का फैसला किया है. जिसका सीधा असर गुजरात के 6 लाख छात्रों पर पड़ेगा.
इसी के बाद मुख्यमंत्री विजय रुपानी, उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल, शिक्षामंत्री भूपेन्द्र सिंह चुडासमा, के. कैलाश नाथ और चीफ सेक्रेटरी अनिल मुकिम की मीटिंग में ये फैसला किया गया कि एसआईटी की रिपोर्ट में ये लगता है कि पेपर लीक हुआ था और छात्रों के सीसीटीवी सबूत के आधार पर इस इम्तिहान को रद्द किया गया है. बता दें कि गुजरात सरकार के जरिए बनाई गई SIT ने सीसीटीवी और एफएसएल की जांच के आधार पर ये माना था कि बिन सचिवालय इम्तिहान में पेपर लीक हुआ था और छात्र इम्तिहान के दौरान नकल कर रहे थे.
गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा का कहना है कि एसआईटी और एफएसएल को 11 मोबाइल फोन जांच के लिए दिए गए थे, साथ ही जो सीसीटीवी फुटेज छात्रों के जरिए दिए गये थे, उसकी भी एफएसएल जांच करने के बाद पाया गया कि परीक्षा में नकल हुई थी. साथ ही गुजरात सरकार ने ये फैसला भी किया है कि जो भी छात्र इम्तिहान में नकल करते हुए सीसीटीवी में देखे गए या जिनके मोबाइल में ये पेपर आया था उनके खिलाफ भी सरकार सख्त कार्रवाई होगी.