वर्तमान समय में हर दूसरी कंपनी विदेशों में अपने अपने बिजनेस को बढ़ाने में प्रयासरत है. इस काम में सफलता दिलाने में सबसे जरूरी भूमिका निभाता है ट्रांसलेटर और एंटरप्रेटर. लिहाजा इस वजह से समय के साथ विदेशी भाषाओं पर पकड़ रखने वालों की डिमांड भी बढ़ी है.
योग्यता:ट्रांसलेटर या एंटरप्रेटर बनने के लिए ट्रांसलेशन में डिप्लोमा कर सकते हैं.
कम से कम दो लैंग्वेज पर कमांड होना चाहिए.
कई संस्थान और यूनिवर्सिटी में लैंग्वेज कोर्सेज चलाए जाते हैं, जिन्हें करने के बाद आप इस फील्ड में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं
कैसे बनाए अपनी पहचान:
किसी कंपनी में सीवी देने पर कई भाषाओं पर पकड़ की विशेषता को बताएं. अपनी फील्ड के साथ दूसरे क्षेत्रों की जानकारी भी रखें. अपने शब्दकोष में इजाफा करें, यह आपको इस क्षेत्र में सफल बनाने में कारगर साबित होगा .
रोजगार के अवसर:
एंटरप्रेटर या ट्रांसलेटर के लिए काम की कोई कमी नहीं है. वे इसमें पार्टटाइम से लेकर फुलटाइम करियर बना सकते हैं. इसमें भी जिनकी चाइनीज, अरेबिक, रशियन, जेपनीज, फ्रेंच आदि लैंग्वेज पर कमांड है, उनके लिए आगे बढ़ने के तमाम मौके हैं. वे यूनिवर्सिटी, मल्टीनेशनल कंपनीज के अलावा, मार्केट सर्वे से जुड़ी कंपनी में काम कर सकते हैं.
प्रमुख संस्थान:
स्कूल ऑफ लैंग्वेज एंड स्टडीज, जेएनयू, दिल्ली
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेज, हैदराबाद
यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली
यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई.