केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड पेपर लीक जैसे मामलों से बचने के लिए कड़े कदम उठा सकता है, जिसमें सत्र और पेपर पैटर्न में बदलाव किए जा सकते हैं. दरअसल, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से गठित एक एक्सपर्ट पैनल ने सिफारिश की है कि प्रश्न पत्र में क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. साथ ही पैनल ने बोर्ड परीक्षा सत्र को छोटा करने का भी सुझाव दिया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग मार्किंग स्कीम को भी दूर करने की मांग की गई है. एचआरडी मिनिस्ट्री के पूर्व सचिव वीएस ओबेरॉय की अध्यक्षता वाले एक पैनल को बोर्ड परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा जांच से संबंधित सभी पहलुओं की समीक्षा करने का काम दिया गया था, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रश्नपत्र बिना किसी लीक या छेड़छाड़ के परीक्षार्थियों तक पहुंच सके.
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साथ ही पैनल को प्रश्न पत्रों के प्रिंटिंग प्रेस से परीक्षा केंद्रों तक ले जाने के मौजूदा सिस्टम की कमियों का आकलन करने के लिए भी कहा गया था. पैनल की ओर से की गई सिफारिशों पर अब एचआरडी मंत्रालय की ओर से विचार किया जाएगा, जिस पर फैसला करने के लिए कोई विशिष्ट समय सीमा नहीं होगी.
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पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि सीबीएसई को सेंटर आधारित प्रिंटिंग के लिए एन्क्रिप्टेड प्रश्न पत्र भेजने पर विचार करना चाहिए. साथ ही सिफारिश है कि निजी स्कूलों की बजाय केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय, आर्मी पब्लिक स्कूल राज्य सरकारों में परीक्षाओं का आयोजन हो. साथ ही सरकारी स्कूल सेंटर के लिए उपलब्ध ना होने पर ही अन्य स्कूलों को सेंटर बनाया जाए.
पैनल का मानना है कि जिन विषयों के लिए कम लोग रजिस्टर करते हैं, उनकी परीक्षा जनवरी-फरवरी में ही आयोजित कर देनी चाहिए. वहीं अन्य विषय जैसे हिंदी, अंग्रेजी, साइंस, सोशल साइंस आदि मुख्य विषयों की परीक्षा मार्च से अप्रैल के बीच होनी चाहिए.