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कम सैलरी पर ऑफर हुई थी नौकरी, IFFCO को बनाया बड़ा ब्रांड

अवस्थी के अनुसार इफको में बतौर प्रबंध निदेशक उनके सामने कर्ज देने वाले बैंकों की दखलअंदाजी बंद करना समेत कई चुनौतियां थी. इसमें नई तकनीक को इफको में लाना और उसके लिए लोगों को तैयार करना,  प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़ाना शामिल है.

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डॉ उदय शंकर अवस्थी
डॉ उदय शंकर अवस्थी

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विश्व की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारिता संस्था 'इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड' यानी इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी को देश में 'किसान और सहकारिता' का अगुआ माना जाता है. स्वतंत्रता सेनानी परिवार से ताल्लुक रखने वाले अवस्थी को इफको को देश के किसानों के बीच एक अहम मुकाम पर पहुंचाने का श्रेय जाता है.

इफको जैसे संस्थान की तरक्की की चुनौती को लेकर अवस्थी बताते हैं कि उन्हें जब इफको से बुलावा आया तो उन्हें उनकी उस वक्त की सैलरी से कम पैसे का ऑफर था, लेकिन वो यह काम हमेशा से करना चाहते थे इसलिए उन्होंने इसे स्वीकारने में देरी नहीं की और नई जिम्मेदारी को एक चुनौती के रूप में लिया.

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अवस्थी के अनुसार इफको में बतौर प्रबंध निदेशक उनके सामने कर्ज देने वाले बैंकों की दखलअंदाजी बंद करना समेत कई चुनौतियां थी. इसमें नई तकनीक को इफको में लाना और उसके लिए लोगों को तैयार करना,  प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़ाना शामिल है. हालांकि  उन्होंने सारी चुनौतियों को एक साथ हैंडल किया और इफको को आगे बढ़ाने के लिए हर जरूरी कार्य किया. उनका कहना है कि आज संतोष मिलता है जब मीडिया वाले कहते हैं कि इफको तो बहुत बड़ा ब्रांड है, इफको तो देश की सबसे बड़ी सोसाइटी है. यही ध्येय था. पूरा हो गया.

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अवस्थी ने बताया कि किसानों के लिए एक ऐसा डिजिटल मंच तैयार किया है जहां किसान सिर्फ खेती के सामान नहीं खरीदते बल्कि अपना सामान बेचने का एड भी लगा सकते हैं और दूसरा जरूरतमंद किसान या ग्राहक उसे खरीद सकता है. उनके इंडियन डिजिटल कोऑपरेटिव प्लेटफॉर्म का मकसद है कि गांव का वो किसान जिसे लिखना नहीं आता, मोबाइल चलाना नहीं आता वो भी मोबाइल उठाए, फोटो देखकर बटन दबाए और अपनी बात कहकर समस्या का समाधान पा ले. और ये सब जब होगा तो ग्रामीण भारत की सूरत और हालत दोनों बदलेगी. गांव बदलेगा, गांव सबल होगा तो देश मजबूत होगा.

अवस्थी के अनुसार उनका कोई प्रेरणास्रोत नहीं है. वो किसी की नकल नहीं करते, किसी को कॉपी नहीं करते और किसी का अनुसरण नहीं करते. वो अपनी मां को सबसे ज्यादा सम्मान देते हैं, लेकिन उनकी लाइन को फॉलो करें, ऐसा नहीं है और अपनी समझ, अनुभव से आगे का कार्य तय करते हैं. इफको में बढ़ते डिजिटल स्वरूप को लेकर उन्होंने कहा कि अगर गांव के किसान, गांव के नौजवान स्मार्टफोन के जरिए दुनिया से जोड़ दिए जाएं तो वो सिर्फ खेत में नहीं, खेत के बाहर भी अपने जीवन स्तर को सुधारने में बड़ी छलांग लगा सकते हैं.

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