दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (डूसू) का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची में सबसे ऊपर आने के लिए अब अपने नाम की शुरुआत में ‘ए’ अक्षर नहीं जोड़ पाएंगे. दरअसल यूनिवर्सिटी ने इस साल से इस विवादास्पद प्रावधान को हटाने का फैसला किया है.
डूसू चुनाव के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी डी एस रावत ने कहा, ‘चुनाव लड़ने के लिए दाखिले के समय यूनिवर्सिटी में दर्ज कराए गए नामों पर ही विचार किया जाएगा. नाम बदलने के लिए अगर कोई अनुरोध मिले तो भी उनपर 30 सितंबर के बाद ही काम होगा.’ गौरतलब है कि मनचाहा बैलेट नंबर पाने के लिए डूसू चुनाव के उम्मीदवार अकसर चुनाव से पहले अपना नाम बदल लेते थे और उनमें ए, एए या .एए. जोड़ लेते थे.
लेकिन पिछले साल ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने इस प्रचलित चलन को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
आइसा ने कहा था कि ऐसा माना जाता है कि ऐसे मतदाता जो किसी खास उम्मीदवार के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं और तब भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं, वे दूसरे नामों पर ध्यान दिए बिना उस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर देते हैं जिसका नाम मतपत्र में पहले आता है.
डूसू के वर्तमान अध्यक्ष मोहित नागर ने पिछले साल एबीवीपी के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन में अपना नाम ‘एएए मोहित नागर’ दिया था जबकि एनएसयूआई के उम्मीदवार गौरव तुशीर ने अपना नाम ‘एए गौरव तुशीर’ दिया था. इसके बाद दोनों को क्रमश: बैलेट नंबर एक और दो आवंटित किया गया.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि डूसू चुनाव से पहले उम्मीदवारों का मतपत्र में सबसे ऊपर आने के लिए अपने नाम से पहले ‘ए’ अक्षर जोड़ना ‘दोषपूर्ण है.’ उच्च न्यायालय ने साथ ही यूनिवर्सिटी से इस तरह के चलन को रोकने के लिए कोई फैसला लेने के लिए कहा था.
-इनपुट भाषा से