जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) अगले साल से एंट्रेंस टेस्ट मई-जून के बजाय दिसंबर में कराने की योजना बना रही है. यह प्रस्ताव इस अप्रैल एकेडमिक काउंसिल की मीटिंग के दौरान रखा गया, जिसे 15 जून को हुई स्टैंडिंग समिति की मीटिंग में स्वीकार कर लिया गया है.
भले ही यह प्रस्ताव टीचर्स ने एकेडमिक काउंसिल की मीटिंग में एक मत से स्वीकार कर लिया हो, लेकिन जेएनयू के छात्रों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है.
आमतौर पर जब जेएनयू में एडमिशन प्रक्रिया शुरू होती है, तब बाकी यूनिवर्सिटीज की एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो जाती है. स्टूडेंट्स के लिए जेएनयू सही समय पर विकल्प के तौर पर सामने नहीं आता. एकेडमिक काउंसिल की सदस्य आयशा किदवई का कहना है कि बीए का एंट्रेंस टेस्ट 12वीं के प्री बोर्ड एग्जाम से पहले कराना ज्यादा बेहतर हो सकता है.
एकेडमिक काउंसिल और स्टैंडिंग समिति द्वारा इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बावजूद इसे लागू करने का फैसला आगामी एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग में लिया जाएगा. अगर इस प्रस्ताव को लागू कर दिया जाता है तो जेएनयू 2016 में दो एंट्रेंस टेस्ट कंडक्ट करेगा. पहला मई-जून में 2016 के बैच के लिए और दूसरा दिसंबर में 2017 के बैच के लिए.
जेएनयू के टीचर्स एसोसिएशन ने फिलहाल इस मसले पर कोई फैसला नहीं लिया है. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (DSF) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया जैसे छात्र संघ इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं. इस पर जेएनयू स्टूडेंट यूनियन का कहना है कि यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक तरीका है. छात्र प्रतिनिधियों की राय जाने बिना ही एकेडमिक काउंसिल की मीटिंग में यह एजेंडा रखा गया.