आज से 99 साल पहले आज ही के दिन एक जिज्ञासु अमेरिकी वैज्ञानिक क्लाइड टॉमबा ने एक बौने ग्रह की खोज की थी. पहले लंबे वक्त तक हमारे सौरमंडल का नौवां ग्रहग्रह मान लिया गया था, लेकिन बाद में इसे ग्रहों के परिवार से बाहर कर दिया गया. इसका नाम था प्लूटो. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जब इस ग्रह नाम रखने के लिए सुझाव मांगे गए तो 11वीं में पढ़ने वाली एक लड़की ने इसे प्लूटो नाम दिया.
248 साल में काटता है सूर्य का चक्र
उसका कहना था कि रोम में अँधेरे के देवता को प्लूटो कहते हैं और इस ग्रह पर भी हमेशा अँधेरा रहता है, इसलिए इसका नाम प्लूटो रखा जाए. प्लूटो को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 248 साल लग जाते हैं. वहीं जिस तरह से हमारे यहां एक दिन 24 घंटे का होता है, ठीक उसी तरह से प्लूटों में यह 24 घंटे 153.36 घंटों के बराबर होता है. यानी यहां दिन रात के बदलने में करीब 6 दिन लगते हैं.
ग्रेविटी है बहुत कम
यहां पृथ्वी के मुकाबले बहुत कम ग्रेविटी है. रिपोर्ट्स के अनुसार यहां पृथ्वी की ग्रेविटी का 7 फीसदी गुरुत्वाकर्षण है. साथ ही यहां के तापमान में भी भारत से बहुत अलग तापमान है. यहां का तापमान और ग्रेविटी इंसान के रहने के हिहाज से नहीं है. इससे सौरमंडल के बौने ग्रहों में गिना जाता है.
कई खगोलविद प्लूटो को ग्रह मानने से इनकार करते हैं और उनका मानना है कि यह 'कुइपर बेल्ड' के पिंडों में से एक हो सकता है. इसलिए साल 2006 में अंतरराष्ट्रीय खगोलशास्त्री संघ या आईएयू की आमसभा में प्लूटो को ग्रह मानने से इंकार कर दिया गया था. आईएयू के प्रस्ताव के मुताबिक अब सिर्फ़ आठ ग्रह बच गए हैं, बुध, शुक्र, पृथ्वी, वृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून.