पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ प्रशासन को लॉकडाउन अवधि के लिए स्कूल फीस से संबंधित आदेशों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. इसके बाद अब निजी स्कूल अब ट्यूशन फीस को छोड़कर किसी भी तरह की फीस की डिमांड नहीं कर पाएंगे.
चंडीगढ़ प्रशासन ने आदेश जारी करते हुए स्कूलों को स्कूल फीस में संशोधन करने और बस किराया, डेवलपमेंट फीस जैसी सेवाओं पर शुल्क लगाने के लिए प्रशासन की सहमति के बिना रोक दिया था. हाईकोर्ट ने ये आदेश निजी स्कूलों के एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.
इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन (ISA) ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके चंडीगढ़ प्रशासन के आदेशों को चुनौती दी थी. संघ ने प्रशासन के आदेशों को चुनौती देते हुए, अदालत को सूचित किया था कि 78 प्राथमिक स्कूल सदस्य हैं जो स्कूल बंद होने के साथ-साथ घाटे का सामना कर रहे थे और उन्हें पूर्ण विद्यालय शुल्क लेने से रोक दिया गया था.
चंडीगढ़ प्रशासन ने अदालत के समक्ष अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा कि स्कूलों को फीस को संशोधित करने से रोक दिया गया था और केवल लॉकडाउन अवधि के लिए अभिभावकों को ये राहत देने के लिए ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी गई थी.
चंडीगढ़ प्रशासन ने अदालत को यह भी बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में चलाए जा रहे सरकारी स्कूल पहले ही अपने स्कूल की फीस माफ कर चुके हैं. यहां यह उल्लेखनीय है कि निजी स्कूल यह साबित करने में भी असफल रहे कि वे घाटे का सामना कर रहे हैं. आईएसए ने अदालत को यह भी बताया कि स्कूल के कुल 78 सदस्यों में से 41 ने पहले ही प्रशासन के आदेशों को लागू कर दिया है.
हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई तक के लिए टाल दी है क्योंकि याचिकाकर्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है.