उत्तर प्रदेश में पहली बार पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने को योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंजूरी दे दी है. जिसमें पुलिस आयुक्त प्रणाली की 50 साल पुरानी मांग मान ली गई है. आपको बता दें, उत्तर प्रदेश सरकार दो शहरों में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने पर विचार कर रही थी. ये सिस्टम यूपी के दो शहरों लखनऊ (Lucknow) और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (NCR) से सटे हुए नोएडा में लागू किया जा रहा है.
वहीं इसे लाने के पीछे सरकार का तर्क ये है कि इस सिस्टम को लागू करने से जिले की लॉ एंड ऑर्डर समेत तमाम प्रशासनिक अधिकार नियुक्त किए गए पुलिस कमिश्नर के पास रहेंगे. आइए जानते हैं कि क्या है कमिश्नरी सिस्टम, इसमें क्या होते हैं अफसरों के अधिकार.
सबसे पहले आपको बता दें, इस सिस्टम के बारे में योगी आदित्यनाथ ने " पिछले 50 सालों से बेहतर और स्मार्ट पुलिसिंग के लिए पुलिस आयुक्त प्रणाली की मांग की जा रही थी. हमारे कैबिनेट ने ये प्रस्ताव पास कर दिया है. सीएम योगी ने कहा कि एडीजे स्तर के अधिकारी पुलिस आयुक्त होंगे, जबकि 9 एसपी रैंक के अधिकारी तैनात होंगे. उन्होंने कहा कि एक महिला एसपी रैंक की अधिकारी महिला सुरक्षा के लिए इस सिस्टम में तैनात होगी.
"Chief Minister Yogi Adityanath: Biggest step towards police reform has been taken by our Govt today. Uttar Pradesh cabinet has approved proposal to setup police commissioner system in Lucknow and Noida. pic.twitter.com/7Nig1417O8
— ANI UP (@ANINewsUP) January 13, 2020
कितना पड़ेगा IAS- IPS की पॉवर में फर्क
भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के भाग 4 के अंतर्गत डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट (जो कि एक IAS अफसर होता है) के पास पुलिस पर नियत्रंण के अधिकार होते हैं. लेकिन पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो जाने से ये अधिकार पुलिस अफसरों को मिल जाते हैं. सरल भाषा में कहा जाए तो जिले की बागडोर संभालने वाले आईएएस अफसर डीएम की जगह पॉवर कमिश्नर के पास चली जाती है.
योगी सरकार का बड़ा फैसला- लखनऊ, नोएडा में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को मंजूरी
दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) को भी कानून और व्यवस्था को विनियमित करने के लिए कुछ शक्तियां प्रदान करता है. इसके अनुसार पुलिस अधिकारी सीधे कोई फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं, वे आकस्मिक परिस्थितियों में डीएम या कमिश्नर या फिर शासन के आदेश के तहत ही कार्य करते हैं, आम तौर से IPC और CRPC के सभी अधिकार जिले का DM वहां तैनात PCS अधिकारियों को दे देता है.
पुलिस कमिश्नर सर्वोच्च पद होता है
कमिश्नर व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर सर्वोच्च पद है. ये व्यवस्था कई महानगरों में है. दरअसल हमें ये व्यवस्था आजादी के बाद विरासत में मिली. वास्तव में ये व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने की है. तब ये सिस्टम कोलकाता, मुंबई और चेन्नई (तब के कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास) में थी.
कमिश्नरी सिस्टम में पुलिस कमिश्नर को ज्यूडिशियल पावर भी होती हैं. बता दें कि इन महानगरों के अलावा पूरे देश में पुलिस प्रणाली पुलिस अधिनियम, 1861 पर आधारित थी और आज भी ज्यादातर शहरों की पुलिस प्रणाली इसी अधिनियम पर आधारित है. इसे लागू करने के पीछे एक वजह ये होती है कि अक्सर बड़े महानगरों में क्राइम रेट ज्यादा होता है. एमरजेंसी हालात में भी पुलिस के पास तत्काल निर्णय लेने के अधिकार नहीं होते. इससे ये स्थितियां जल्दी नहीं संभल पातीं.
कमिश्नरी सिस्टम से पुलिस कमिश्नर के पास CRPC के तहत कई अधिकार आ जाते हैं. इस व्यवस्था में पुलिस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए खुद ही मजिस्ट्रेट की भूमिका निभाती है. ऐसा माना जाता है कि पुलिस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई खुद कर सकेगी तो अपराधियों के मन में डर जगेगा और क्राइम रेट घटेगा.