रक्तदान है महादान यह सभी जानते हैं, लेकिन हम में से कितने ऐसे हैं जो नियमित रक्तदान करते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन रक्तदान को लेकर जागरुकता अभियान चलाता रहता है और इसी कारण दुनियाभर के मुल्कों में 14 जून को World Blood Donor Day (विश्व रक्तदान दिवस) मनाया जाता है. इस दिन जागरुकता अभियान चलाया जाता है और जनमानस को मुफ्त रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया जाता है.
लेकिन कम लोगों को ही पता होगा कि भले ही WHO ने World Blood Donor Day के लिए एक दिन सुनिश्चित किया हो, पर वो कार्ल लैंडस्टेनर ही थे, जिनकी वजह से रक्तदान संभव हो पाया.
कार्ल लैंडस्टेनर को आधुनिक ब्लड ट्रांसफ्यूजन का पितामह कहा जाता है और यही वजह है कि उनके जन्मदिन यानी कि 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस के रूप में मनाया
जाता है.
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कार्ल लैंडस्टेनर का जन्म 14 जून 1868 को हुआ था. साल 1901 में कार्ल ने A,B,O जैसे ब्लड ग्रुप का पता लगाया.
यही नहीं उन्होंने साल 1909 में पोलियो वायरस का भी पता लगाया. इसके बाद ही पोलियो को नियंत्रित करने का अभियान शुरू किया गया.
कार्ल की सबसे महत्वपूर्ण खोज में ब्लड ग्रुप को अलग-अलग करने से जुड़े सिस्टम का पता लगाना और एलेग्जेंडर वेनर के साथ मिलकर 1937 में रेसस फैक्टर का पता लगाना
है, जिसकी वजह से खून चढ़ाना मुमकिन हो पाता है.
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उनकी खोज की वजह से ही आज 11 करोड़ से ज्यादा रक्तदान रोजाना होते हैं और लाखों की जिंदगियां बचाई जाती हैं.
इस साल रक्तदान दिवस का स्लोगन है ‘What can you do? Give blood. Give now. Give often’ जो इस बात पर केंद्रित है कि प्रत्येक व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए, आप क्या कर सकते हैं, रक्त दें, अभी दें और अक्सर दें. यह थीम उन लोगों को समर्पित है जो रक्त की कमी से लोगों की जान जाते देखते तो हैं पर खून देने की हिम्मत नहीं जुटा पाते.