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अहम सीटें, नजदीकी मुकाबले और करोड़पति उम्मीदवार: एक नज़र में असम के पहले चरण का चुनाव

ADR डेटा के मुताबिक असम में पहले चरण में करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या 2016 की तुलना में बढ़ गई है. 2016 में 83 करोड़पति उम्मीदवारों की तुलना में इस बार 101 ऐसे उम्मीदवार मैदान में हैं.

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असम में चुनाव प्रचार करते कांग्रेस नेता राहुल गांधी (पीटीआई)
असम में चुनाव प्रचार करते कांग्रेस नेता राहुल गांधी (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2016 में 83 तो इस बार 101 करोड़पति प्रत्याशी मैदान में
  • पिछले चुनाव में 10 सीटों पर जीत का अंतर 5,000 से कम
  • पहले चरण में अधिकतर उम्मीदवार 41 से 60 आयु वर्ग के

126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए 27 मार्च को पहले चरण के चुनाव में 47 सीटों के लिए मतदान होना है. इस चरण में 37 मौजूदा विधायक दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं. इनमें 24 बीजेपी से चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस और असम गण परिषद (AGP) से 6-6 और AIUDF से एक विधायक चुनावी रण में फिर से भाग्य आजमा रहे हैं.  

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पहले चरण की 47 सीटों में से 11 अपर असम और उत्तरी असम से हैं. 5 सीटें सेंट्रल असम के नगांव जिले से हैं. 2016 में इस क्षेत्र में बीजेपी और उसकी सहयोगी AGP ने 35 सीट जीत कर बड़ी कामयाबी हासिल की थी. बीजेपी को अकेले 36% वोट शेयर के साथ 27 सीटों पर जीत हासिल हुई थीं. वहीं कांग्रेस को समान वोट प्रतिशत के साथ सिर्फ 9 सीटों पर ही जीत मिली थी.

2016 से पहले तक अपर असम को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. कांग्रेस ने 2011 में यहां 38 सीट (46% वोट शेयर) और 2016 में 27 सीट (39% वोट शेयर) जीती थीं. 

जीत का अंतर
2016 में 10 ऐसी सीटें रहीं जहां जीत का अंतर 5,000 से कम रहा. वहीं 2011 में ऐसी सीटों की संख्या 9 और 2006 में 23 रही. पिछले चुनाव में शिवसागर विधानसभा सीट पर जीत का अंतर सिर्फ 542 वोट का रहा. इसी तरह अमगुरी, लखीमपुर, डूम डूमा और थोवरा में भी हालिया चुनावों में कांटे की टक्कर देखी गई.

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दूसरी तरफ पिछले चुनाव में 18 सीटों पर जीत का अंतर 20,000 से अधिक रहा. इनमें से 12 सीट बीजेपी के खाते में गई, वहीं उसकी सहयोगी AGP ने 3 सीटें जीतीं. बाकी 3 सीटों में से एक-एक पर कांग्रेस, AIDUF और निर्दलीय को जीत मिली.

महिला उम्मीदवारों की कमी 
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से जुटाए डेटा के मुताबिक पहले चरण में असम में जिन 47 सीटों पर चुनाव होने जा रहा है, उसके लिए कुल 264 उम्मीदवार मैदान में हैं, इनमें सिर्फ 25 महिला उम्मीदवार हैं. कांग्रेस ने 6 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है. वहीं बीजेपी ने तीन और AGP ने सिर्फ एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है. बीते चुनावों में भी ऐसा ही ट्रेंड रहा है. 

दिलचस्प है कि गोलाघाट विधानसभा सीट से 2001 से अजंता नियोग चुनाव जीतती आ रही हैं. पहले वो कांग्रेस में थीं. पिछले साल ही उन्हें कांग्रेस से निष्कासित किया गया. इस बार वे बीजेपी के टिकट पर ताल ठोक रही हैं. इस बार तीन विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं- शिवसागर, बताद्रोवा और टियोक, जहां अहम राजनीतिक दलों ने महिला उम्मीदवारों को ही टिकट दिया है.

ADR डेटा के मुताबिक पहले चरण में अधिकतर उम्मीदवार (59%) 41 से 60 वर्ष आयु वर्ग के हैं. पिछले चुनावों में भी यही ट्रेंड था. पहले चरण में सबसे युवा उम्मीदवार मैथ्यू टोपनो हैं, जिनकी उम्र 25 साल है और वे रंगापारा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. दूसरी तरफ सबसे उम्रदराज उम्मीदवार 85 साल के प्रेमधर बोरा हैं, वे बिहपुरिया सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं.   

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2016 में 47 सीटों में से 5 ऐसे निर्वाचन क्षेत्र थे, जहां जीत के अंतर से ज्यादा मतदाताओं ने NOTA पर बटन दबाया. इन सीटों में सूटिया, थोवरा सीटें बीजेपी, सारुपथार, शिवसागर और डूम डूमा कांग्रेस के खाते में गईं. कुल वोटों में से 1.5% वोट NOTA को गए.

शिवसागर जिले का अमगुरी विधानसभा क्षेत्र अपने आप में अनूठा है. यहां से 1985 से हुए चुनावों में कोई भी पार्टी लगातार दो चुनाव नहीं जीत सकी. 2016 में इस सीट पर AGP के प्रदीप हजारिका सिर्फ 1,620 वोट के अंतर से जीते थे. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार अंगकिता दत्ता को हराया था.   

धन और बाहुबल  
ADR डेटा के मुताबिक असम में पहले चरण में करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या 2016 की तुलना में बढ़ गई है. 2016 में 83 करोड़पति उम्मीदवारों की तुलना में इस बार 101 ऐसे उम्मीदवार मैदान में हैं.  

हालांकि प्रति उम्मीदवार औसत संपत्ति में मामूली कमी आई है. 2016 में दो करोड़ रुपये की तुलना में ये 2021 में 1.8 करोड़ रुपये रह गई है. जहां तक आपराधिक मुकदमों वाले उम्मीदवारों की संख्या का सवाल है तो इस बार 41 उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मुकदमे होना घोषित किया है. 2016 चुनाव में ऐसे उम्मीदवारों की संख्या सिर्फ 17 थी. (इनपुट-पीयूष अग्रवाल)

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