
यूपी में जब-जब चुनाव या उपचुनाव आते हैं, जेल में बंद आजम खान की पूछ बढ़ जाती है. सूबे की नौ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं और उपचुनावों के लिए जारी प्रचार के बीच भी आजम अचानक सुर्खियों में आ गए हैं. आजम के सुर्खियों में आने की वजह है दो सियासी पार्टियों के प्रमुख की उनके परिजनों से हुई मुलाकात. समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम खान के घर पहुंचकर उनकी पत्नी तंजीम फातिमा से मुलाकात की है.
वहीं, जेल में बंद अब्दुल्ला आजाद से मिलने आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एडवोकेट चंद्रशेखर जेल पहुंच गए. उपचुनावों के वक्त अचानक बढ़ी आजम की पूछ के पीछे क्या है, क्यों नेता आजम को मनाने में जुटे हैं? यह मुलाकातें बस हमदर्दी जताने के लिए, साथ खड़े नजर आने के लिए, दर्द बांटने के लिए ही हुईं या इसके पीछे मकसद कुछ और भी था? बात इसे लेकर भी हो रही है.
अखिलेश यादव से लेकर एडवोकेट चंद्रशेखर तक, दो दलों के दो शीर्ष नेताओं की आजम के परिजनों से हुई मुलाकात के पीछे उपचुनाव का वोट गणित भी वजह बताया जा रहा है. दरअसल, यूपी की नौ विधानसभा सीटों- मीरापुर, सीसामऊ, कुंदरकी के साथ ही करहल, मझवां, फूलपुर, खैर, गाजियाबाद, कटेहरी विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हो रहे हैं. जिन नौ सीटों पर उपचुनाव हैं, उनमें से तीन सीटें मीरापुर, सीसामऊ और कुंदरकी मुस्लिम बाहुल्य हैं.
मीरापुर में 40, सीसामऊ में 45 फीसदी मुस्लिम वोट
यूपी की मीरापुर विधानसभा सीट के जातीय गणित की बात करें तो यहां 40 फीसदी मुस्लिम वोट है. मीरापुर सीट से 2022 के चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के चंदन चौहान जीते थे. आरएलडी ने 2022 का चुनाव सपा के साथ गठबंधन कर लड़ा था लेकिन इस बार वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में है.
सांसद निर्वाचित होने के बाद चंदन के इस्तीफे से रिक्त हुई इस सीट पर आरएलडी और सपा, दोनों ही पार्टियां पूरा जोर लगा रही हैं. सपा ने यह सीट अपने सिंबल पर आखिरी बार 1996 में जीती थी. तब साइकिल निशान से संजय सिंह जीते थे. सपा ने इस बार 2007 में आरएलडी के टिकट पर विधायक रहे कादिर राणा की बहु सुम्बुल राणा को उम्मीदवार बनाया है. पार्टी की कोशिश 28 साल बाद फिर से इस सीट पर साइकिल दौड़ाने की है.
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कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट से 2022 के चुनाव में इरफान सोलंकी विधायक निर्वाचित हुए थे. इरफान को आपराधिक मामले में सजा सुनाए जाने के बाद विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहरा दिया गया था. रिक्त हुई इस सीट के लिए भी 20 नवंबर को मतदान होना है. इस सीट से सपा ने इरफान की पत्नी नसीम सोलंकी को उतारा है. सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में करीब 45 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं. सपा एकमुश्त मुस्लिम और यादव के साथ ही लगातार तीन बार के विधायक इरफान सोलंकी पर एक्शन को लेकर नाराजगी के वोट मिलने की उम्मीद पाले है.
कुंदरकी में 65 फीसदी मुसलमान तय करते हैं नतीजा
कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य सीट है. इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 65 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं जो नतीजा तय करते हैं. सपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर उपचुनाव में कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं जिनमें से बीजेपी उम्मीदवार को छोड़ दें तो बाकी सभी 11 प्रत्याशी मुस्लिम समाज से ही आते हैं.
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जिया-उर-रहमान बर्क के सांसद निर्वाचित होने से रिक्त हुई इस सीट पर सपा ने हाजी मोहम्मद रिजवान और बसपा ने रफतउल्ला को उतारा है. बीजेपी ने इस सीट पर 2017 और 2022 के चुनाव में शिकस्त झेल चुके ठाकुर रामवीर सिंह को उतारा है. कुंदरकी में एएसपी और एआईएमआईएम गठबंधन भी मजबूती से चुनाव लड़ रहा है.
आजम परिवार के जरिये मुस्लिम वोट पर नजर
अखिलेश यादव का अचानक आजम खान के घर पहुंचना हो या चंद्रशेखर का अब्दुल्ला आजम से मिलने जेल पहुंच जाना, दोनों ही नेताओं की सक्रियता के पीछे आजम परिवार के साथ खड़े नजर आकर मुस्लिम मतदाताओं को एक संदेश देने की रणनीति वजह बताई जा रही है. कुंदरकी जैसी सीट पर मुस्लिम मतों का विभाजन हुआ तो सपा के गढ़ में कमल न खिल जाए, इसे लेकर भी सपा अलर्ट है.