
आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है. इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में आंध्र में एनडीए की सरकार बनने का अनुमान है. आंध्र की 175 विधानसभा सीटों में से एनडीए को 98 से 120 सीटें मिल सकती हैं. वहीं, मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस को 55 से 77 सीटें मिलने की संभावना है.
अगर एग्जिट पोल का अनुमान सही साबित होता है तो पांच साल में ही आंध्र प्रदेश में सरकार एक बार फिर बदलने जा रही है. ये तब होगा, जब पांच साल पहले ही 2019 के विधानसभा चुनाव में आंध्र में जगन मोहन रेड्डी की आंधी चली थी और उनकी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने 151 सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि, आंध्र की मुख्य विपक्षी पार्टी टीडीपी 23 सीटों पर ही सिमट गई थी.
लेकिन, इस बार टीडीपी एक बार फिर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है. टीडीपी को 78 से 96 सीटें मिल सकती है. उसे 42% वोट मिलने का अनुमान है. दूसरी ओर, वाईएसआर कांग्रेस को वोट तो 44% वोट मिलने की उम्मीद है, लेकिन सीटें जबरदस्त घट रहीं हैं.
पर ये सब कैसे हुआ? पांच साल पहले 150 से ज्यादा सीटें जीतकर सत्ता में आई जगन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस इस बार विपक्ष में जाती क्यों दिख रही है.
इस बारे में एक्सिस माई इंडिया के एमडी और चेयरमैन प्रदीप गुप्ता बताते हैं कि पिछले साल तक आंध्र में सबकुछ जगन मोहन रेड्डी के पक्ष में था. जनता में भी उनकी लोकप्रियता थी. लेकिन पिछले साल पूर्व चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई. इससे जनता में नायडू को लेकर सहानुभूति पैदा हुई और उसका असर चुनाव में दिख रहा है.
आंध्र में कैसे हुआ खेला?
प्रदीप गुप्ता बताते हैं कि पिछले साल जब चंद्रबाबू नायडू को गिरफ्तार किया गया और उसके बाद पवन कल्याण ने जाकर उनसे मुलाकात की, उससे पूरा मोमेंटम बदल गया. उनका कहना है कि इसके बाद जगन मोहन रेड्डी ने जो कुछ भी किया, सब उनके खिलाफ गया. जगन रेड्डी ने कई उम्मीदवारों के टिकट काटे, जिस कारण पार्टी के कई बड़े नेता वाईएसआर से अलग होकर टीडीपी में चले गए.
पवन कल्याण बड़ा फैक्टर
पिछली बार बीजेपी, टीडीपी और पवन कल्याण की जनसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. लेकिन इस बार तीनों पार्टियां साथ आईं और जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ चुनाव लड़ा. इसका असर भी दिख रहा है.
आंध्र में बीजेपी और टीडीपी को साथ लाने में पवन कल्याण की बड़ा रोल रहा. टीडीपी और बीजेपी 2018 में अलग हो गए थे. लेकिन पिछले साल जब चंद्रबाबू नायडू जेल गए तो पवन कल्याण ने जाकर उनसे मुलाकात की और एनडीए में शामिल होने के लिए मनाया.
इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई के मुताबिक, आंध्र की राजनीति में सितंबर का महीना टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ. इसी महीने सीआईडी ने चंद्रबाबू नायडू को गिरफ्तार किया था. इसके बाद पवन कल्याण ने चंद्रबाबू नायडू और प्रधानमंत्री मोदी को साथ लाने में पूरा जोर लगा दिया.
उन्होंने बताया कि पवन कल्याण ने न सिर्फ चंद्रबाबू नायडू और प्रधानमंत्री मोदी को भी साथ आने के लिए मनाया.
राजदीप सरदेसाई बताते हैं जगन मोहन रेड्डी ने संसद के अंदर और बाहर वही सब किया, जो प्रधानमंत्री चाहते थे. लेकिन जब गठबंधन की बात आती थी, तो जगन ने कभी हाथ नहीं मिलाया, क्योंकि उनका कोर वोटर मुस्लिम और ईसाई हैं. इस कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंद्रबाबू नायडू के साथ जाना बेहतर समझा.
लोकसभा में भी एनडीए
आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों में से ज्यादातर पर एनडीए की जीत का अनुमान है. एनडीए को 21 से 23 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि, वाईएसआर कांग्रेस को 2 से 4 सीटों पर जीत मिल सकती है.