आम आदमी पार्टी (आप) ने 2012 में अपनी स्थापना के बाद से भारतीय राजनीति में, पहले दिल्ली और फिर बाद में पंजाब में, एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है. अन्ना हजारे द्वारा चलाए गए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उभर कर आई AAP ने पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों को चुनौती दी थी. राजनीतिक पहचान बनाने के बाद AAP ने अब तक कई फैसले लिए, जो इसके भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण साबित हुए. आज अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर आतिशी को अपने उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तावित किया. इस फैसले के बाद AAP एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. आइए, जानते हैं पार्टी के गठन से लेकर अब तक के वो अहम फैसले, जो अरविंद केजरीवाल को आगामी चुनाव में जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकते हैं.
AAP की स्थापना
नवंबर 2012 में अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम ने औपचारिक रूप से आम आदमी पार्टी की स्थापना की. यह फैसला अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकला, लेकिन हजारे के आंदोलन ने राजनीतिक रास्ता नहीं अपनाया. इसके विपरीत AAP ने चुनाव लड़ने और अपनी विचारधारा को शासन के जरिए लागू करने का लक्ष्य रखा. इस फैसले ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को राजनीतिक पार्टी के रूप में बदल दिया.
2013 दिल्ली विधानसभा चुनाव और AAP की एंट्री
2013 में AAP ने पहली बार दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ा और 70 में से 28 सीटों पर जीत दर्ज की. पार्टी ने भले ही बहुमत नहीं हासिल किया, लेकिन कांग्रेस पार्टी के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई. अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और यह AAP का मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश का संकेत था. यह जीत एक महत्वपूर्ण क्षण था, क्योंकि इसने दिखाया कि एक नई पार्टी भी स्थापित राजनीतिक दलों को चुनौती दे सकती है.
महज 49 दिनों में इस्तीफा
फरवरी 2014 में केवल 49 दिनों के कार्यकाल के बाद अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उनका इस्तीफा जनलोकपाल बिल को विधानसभा में पास न करवा पाने के बाद हुआ. केजरीवाल का कहना था कि उनकी सरकार बिना इस वादे को पूरा किए नहीं चल सकती, जबकि आलोचकों ने इस कदम को अस्थिरता लाने वाला और समय से पहले का निर्णय बताया. इस फैसले ने आप की राजनीतिक रणनीति और शासन के प्रति उसके दृष्टिकोण पर बहस छेड़ दी.
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 में ऐतिहासिक जीत
2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP ने जोरदार वापसी की और 70 में से 67 सीटें जीत लीं. इस प्रचंड जीत ने आप को दिल्ली की राजनीति में एक मजबूत स्थिति दिलाई और अरविंद केजरीवाल फिर से मुख्यमंत्री बने. यह चुनाव AAP के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, क्योंकि इससे पार्टी की जनता से जुड़ने की क्षमता और उसकी शासन की नीतियों को समर्थन मिला.
मोहल्ला क्लीनिक और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
2015 में सत्ता में लौटने के बाद AAP ने मोहल्ला क्लीनिक की शुरुआत की. यह स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं देने का एक मॉडल था, जिसका उद्देश्य दिल्ली के गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों को प्राथमिक चिकित्सा सेवाएं मुफ्त में प्रदान करना था. यह फैसला दिल्ली के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने की क्षमता के साथ आया, हालांकि इसे कार्यान्वयन में चुनौतियों और स्थिरता को लेकर आलोचना भी झेलनी पड़ी.
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सुधार
AAP ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश किए और सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया. इसके तहत नए क्लासरूम बनाए गए, और कई अन्य सुविधाओं में भी सुधार किया गया, जिसमें शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देना भी शामिल है. इस फैसले का उद्देश्य निजी और सरकारी स्कूलों के बीच की खाई को कम करना था. AAP की यह नीति शासन के मॉडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी गई, हालांकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर बहस जारी है.
फ्री वाई-फाई
आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने दिल्ली में विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त वाई-फाई उपलब्ध कराने के लिए एक योजना शुरू की थी. यह निर्णय सभी के लिए डिजिटल पहुंच और कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था. इस पहल क्या हुआ, यह अभी स्पष्ट नहीं है. मोबाइल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए सस्ते डेटा के कारण न तो आम आदमी पार्टी के नेता और न ही आम नागरिक इस पहल के बारे में अब बात करते हैं.
ऑड-ईवन ट्रैफिक
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए AAP ने 2016 में ऑड-ईवन ट्रैफिक योजना लागू की. इसके तहत निजी वाहनों को उनके रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर वैकल्पिक दिनों में चलने की अनुमति दी गई. इस नीति का उद्देश्य ट्रैफिक को कम करना और प्रदूषण को रोकना था. इस कदम की सराहना भी हुई, लेकिन इसकी सीमित प्रभावशीलता और दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर आलोचना भी हुई.
पानी और बिजली पर सब्सिडी
AAP ने दिल्ली के निवासियों की जीवन लागत को कम करने के उद्देश्य से पानी और बिजली पर सब्सिडी दी. इसके तहत प्रति घर प्रति माह 20,000 लीटर तक पानी मुफ्त और 200 यूनिट तक की बिजली पर सब्सिडी दी गई. ये फैसले निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हुए, हालांकि विपक्षी पार्टियों ने इसे वित्तीय रूप से अस्थिर बताया.
महिला सुरक्षा और मुफ्त बस यात्रा
महिला सुरक्षा और उनकी आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए AAP ने दिल्ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना शुरू की. इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को महिलाओं के लिए अधिक सुलभ बनाना था. यह फैसला महिला कल्याण पर आप के व्यापक फोकस का हिस्सा था, हालांकि इसके प्रभाव और बजट पर इसके असर को लेकर आलोचना भी हुई.
दिल्ली शराब घोटाला
इस मामले में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार पर आरोप है कि उसने 2021 में लागू की गई नई शराब नीति के तहत कथित तौर पर शराब लाइसेंस देने में भ्रष्टाचार किया. इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं. मुख्यमंत्री केजरीवाल सहित आप के कई बड़े नेता इस मामले में गिरफ्तार भी हो चुके हैं. हालांकि, अरविंद केजरीवाल और आप ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है और इसे केंद्र सरकार की बदले की राजनीति बताया है. केजरीवाल का कहना है कि उनकी पार्टी के खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है. इस मामले के बाद से ही दिल्ली की राजनीति में खलबली मची हुई है.
केजरीवाल का इस्तीफा और आतिशी को CM पद
हाल ही में एक बड़े घटनाक्रम के तहत अरविंद केजरीवाल ने कुछ दिन पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की बात कही. आज उन्होंने इस्तीफा देते हुए अपनी उत्तराधिकारी के रूप में पार्टी नेता आतिशी मार्लेना का नाम आगे रखा. आतिशी को खासतौर पर शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए जाना जाता है. लेकिन यह निर्णय पार्टी में संभावित नेतृत्व परिवर्तन की ओर कतई इशारा नहीं करता है. वो महज अगामी विधानसभा चुनाव तक दिल्ली की CM रहेंगी. आगे का फैसला चुनाव नतीजों पर डिपेंड करेगा.
आप ने अपने गठन से लेकर अब तक कई बड़े फैसले किए हैं, जो न सिर्फ पार्टी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहे हैं, बल्कि दिल्ली की राजनीतिक परिदृश्य पर भी असर डाला है. स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सुधार से लेकर महिला सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर उठाए गए कदमों तक, AAP का फैसला 'साहसी' और कभी-कभी 'विवादास्पद' भी रहा है. अब जब अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया है, पार्टी की भविष्य की दिशा इस पर निर्भर करेगी कि वह अपने एजेंडे को जनता के सामने कैसे रखती है, और दिल्ली की 2 करोड़ जनता पार्टी के इस फैसले पर क्या फैसला सुनाती है.