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हरियाणा में फैमिली तो कश्मीर में सरप्राइजिंग फेस... दोनों राज्यों में BJP की रणनीति में ये हैं 5 बड़े अंतर

हरियाणा और जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी अलग-अलग रणनीति के साथ बढ़ती नजर आ रही है. हरियाणा में पार्टी ने टिकट बंटवारे में फैमिली कार्ड को तवज्जो दी है तो वहीं कश्मीर में सरप्राइजिंग फेस पर फोकस किया है. दोनों राज्यों में पार्टी की रणनीति में बड़े अंतर क्या हैं?

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बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटोः पीटीआई)
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटोः पीटीआई)

हरियाणा में लगातार दो बार से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार है और जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद चुनाव हो रहे हैं. जम्मू कश्मीर में 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 25 सीटें जीतकर दूसरी बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. अब बीजेपी दोनों ही राज्यों का चुनावी रण जीतकर सत्ता तक पहुंचने के लिए माइक्रो प्लान के साथ मैदान में है. दोनों ही राज्यों में बीजेपी की रणनीति भी अलग-अलग है. हरियाणा और जम्मू कश्मीर के लिए बीजेपी चुनावी रणनीति में अंतर को पांच पॉइंट्स में समझा जा सकता है.

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1- हरियाणा में फैमिली, कश्मीर में सरप्राइजिंग फेस

टिकट बंटवारे की बात करें तो दोनों राज्यों में बीजेपी की रणनीति अलग नजर आती है. राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ मोर्चा खोले रखने वाली बीजेपी ने हरियाणा चुनाव में फैमिली कार्ड खेला है. जबकि जम्मू कश्मीर की राजनीति में पांव जमाने की कोशिश में जुटी पार्टी का जोर सरप्राइजिंग फेस पर है. बीजेपी ने हरियाणा में कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई, किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी आरती सिंह राव, करतार भडाना के बेटे मनमोहन भडाना, सतपाल सांगवान के बेटे सुनील सांगवान  को टिकट दिया है. हरियाणा जनचेतना पार्टी के प्रमुख पूर्व मंत्री विनोद शर्मा की पत्नी शक्ति रानी शर्मा को भी पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है.

वहीं, जम्मू कश्मीर के चुनाव में पार्टी ने कविंद्र गुप्ता, डॉक्टर निर्मल सिंह जैसे आजमाए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने की जगह फ्रेश चेहरों पर फोकस किया है. जम्मू कश्मीर बीजेपी के अध्यक्ष रविंद्र रैना, डॉक्टर देवेंद्र मन्याल और जीवन लाल जैसे कुछ पुराने चेहरे भी फिर से मैदान में हैं लेकिन पार्टी का जोर नए चेहरों पर अधिक नजर आता है. बीजेपी ने शगुन परिहार को किश्तवाड़ सीट से मैदान में उतारा है. शगुन एक आतंकी हमले में अपनी जान गंवाने वाले अजीत परिहार की बेटी हैं. 29 साल की शगुन के चाचा अनिल परिहार बीजेपी के नेता थे लेकिन पार्टी उनको उम्मीदवार बनाकर कार्यकर्ताओं और कश्मीरी विस्थापितों को हैंड होल्डिंग का संदेश दिया ही, चौंकाया भी. बीजेपी ने    

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2- बगावत कंट्रोल करने की रणनीति में भी अंतर

हरियाणा हो या जम्मू और कश्मीर, दोनों ही राज्यों में विरोध के सुर सुनाई दिए. हरियाणा में बीजेपी उम्मीदवारों के ऐलान के बाद जहां दो सौ से अधिक नेताओं ने पार्टी छोड़ दी, वहीं जम्मू कश्मीर के पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कार्यालय पहुंचकर नारेबाजी और विरोध-प्रदर्शन किया. दोनों ही राज्यों में बगावत कंट्रोल करने की रणनीति में भी भिन्नता नजर आई. हरियाणा में बीजेपी जहां वेट एंड वॉच की मुद्रा में है तो वहीं जम्मू कश्मीर में पार्टी ताबड़तोड़ नियुक्तियों के जरिये नाराजगी का फैक्टर न्यूट्रल करने की कोशिशों में जुटी नजर आ रही है.

जम्मू कश्मीर बीजेपी के उपाध्यक्ष रहे पवन खजुरिया ने टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. ऐसे में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती थी कि जिन वरिष्ठ नेताओं को टिकट नहीं दिया गया है, उनको संतुष्ट किया जाए, बागी होने से रोका जाए. अब पार्टी ने चुनावों के बीच आनन-फानन में डॉक्टर निर्मल सिंह को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष, सुखनंदन चौधरी को उपाध्यक्ष, सत शर्मा को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष और कविंद्र गुप्ता को चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. ये सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से की गई हैं. ये चारों ही नेता पुराने कद्दावर हैं और इस चुनाव में बीजेपी से टिकट के प्रबल दावेदार भी थे लेकिन पार्टी ने इन्हें उम्मीदवार बनाने से परहेज किया.

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3- हरियाणा में 'वोकल फॉर लोकल', कश्मीर में नेशनल 

बीजेपी की पिछले कुछ वर्षों में एक रणनीति रही है- सीएम फेस बताने से परहेज करने की. जहां सरकार हो, वहां भी और जिन राज्यों में पार्टी विपक्ष की भूमिका में हो, वहां भी. बीजेपी हर चुनाव में सामूहिक नेतृत्व और पीएम मोदी का चेहरा आगे कर ही उतरती आई है लेकिन हरियाणा और जम्मू कश्मीर के चुनाव में अलग रणनीति नजर आ रही है.

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हरियाणा में बीजेपी 'वोकल फॉर लोकल' के फॉर्मूले पर आगे बढ़ती दिख रही है तो जम्मू कश्मीर में लोकल के साथ नेशनल का सम्मिश्रण भी है. गृह मंत्री अमित शाह यह साफ कर चुके हैं कि हरियाणा में नायब सिंह सैनी ही सीएम होंगे. पार्टी सूबे में पैन हरियाणा या नेशनल मुद्दों से परहेज कर रही है और जोर विधानसभावार समस्याओं और मुद्दों पर है. वहीं, जम्मू कश्मीर में बीजेपी अनुच्छेद 370 की वापसी नहीं होने देने को लेकर भी मुखर है. यह भी एक वजह है कि पार्टी कश्मीर की उन सीटों पर उम्मीदवार उतारने की जगह निर्दलीयों या छोटे दलों के उम्मीदवारों के समर्थन की रणनीति पर बढ़ रही है जहां लोकल सेंटिमेंट अधिक प्रभावी नजर आ रहे हैं.

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4- हरियाणा में जातीय गणित, कश्मीर में सामाजिक

हरियाणा में बीजेपी का फोकस जातीय गणित साधने पर है. पार्टी ने अब तक घोषित 88 उम्मीदवारों में 20 ओबीसी को टिकट दिया है. पार्टी ने 16 जाट को भी टिकट दिया है. जाट पॉलिटिक्स की पिच पर कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. ऐसे में पार्टी का ध्यान गैर जाट जातियों की गोलबंदी पर है. वहीं, जम्मू कश्मीर में बीजेपी अपने परंपरागत कश्मीरी विस्थापितों के साथ ही गुर्जर-बकरवाल और पहाड़ी समुदाय को साध वोटों का नया समीकरण गढ़ने की रणनीति पर चल रही है.  

5- जम्मू कश्मीर में फ्रीबिज का दांव, हरियाणा में अभी मौन

बीजेपी फ्रीबिज को लेकर विपक्षी पार्टियों पर आक्रामक रही है. मध्य प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ तक में सफल प्रयोग के बाद पार्टी ने अब जम्मू कश्मीर में भी डायरेक्ट कैश बेनिफिट वाला दांव चल दिया है. बीजेपी ने जम्मू कश्मीर चुनाव के लिए जारी संकल्प पत्र में हर परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला को 18000 रुपये सालाना, किसानों को किसान सम्मान निधि के तहत 10000 रुपये सालाना, युवाओं को कोचिंग फी के 10000 और तीन हजार तक यातायात भत्ता देने का वादा किया है.

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पार्टी ने जम्मू कश्मीर के चुनाव में भूमिहीन परिवारों को पांच मरला जमीन देने का भी वादा किया है. हरियाणा में पार्टी की ओर से अब तक इस तरह का कोई ऐलान नहीं किया गया है. हालांकि, बीजेपी का चुनाव घोषणा पत्र अभी आना है और कड़ी लड़ाई को देखते हुए इस बात की संभावनाएं जताईं भी जा रही हैं कि पार्टी महिलाओं के लिए डायरेक्ट कैश बेनिफिट का आजमाया दांव यहां भी चल दे.

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