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हरियाणा की सभी 90 सीटों पर मतदान के साथ ही हरियाणा में विधानसभा चुनाव का शोर अब थम चुका है. हरियाणा में मतदान के अंतिम आंकड़े अभी नहीं आए हैं. चुनाव नतीजे 8 अक्टूबर को आएंगे लेकिन एग्जिट पोल के अनुमान आ गए हैं. आजतक सी वोटर के एग्जिट पोल अनुमानों में कांग्रेस की सरकार बनती दिख रही है. कांग्रेस को 43.8 फीसदी वोट के साथ 50 से 58 सीटें मिलने का अनुमान एग्जिट पोल नतीजों में जताए गए हैं. सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 37.2 फीसदी वोट के साथ 20 से 28 सीटें मिल सकती हैं.
अन्य को 19 फीसदी वोट शेयर के साथ 10 से 14 सीटें मिलने का अनुमान एग्जिट पोल नतीजों में जताया गया है. अन्य में दुष्यंत चौटाला की पार्टी से लेकर इंडियन नेशनल लोक दल, गोपाल कांडा की पार्टी और बसपा जैसी पार्टियां भी हैं. कांग्रेस 2019 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले लगभग 16 फीसदी वोट गेन करती नजर आ रही है. कांग्रेस को वोटों का यह लाभ अन्य के खाते से हो रहा है. सवाल है कि वो कौन से फैक्टर हैं जो हरियाणा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में गए? इसे पांच फैक्टर में समझा जा सकता है.
1- किसान
केंद्र सरकार की ओर से तीन नए कृषि कानून लाए गए थे. इन कानूनों के खिलाफ किसान सड़कों पर उतर आए और पंजाब के साथ हरियाणा आंदोलन का केंद्र बनकर उभरा था. किसान आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर से लेकर उनकी सरकार के कई मंत्रियों को किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. एमएसपी की लीगल गारंटी की मांग को लेकर शंभू बॉर्डर पर किसान महीनों से धरने पर हैं. कांग्रेस ने इसे भी चुनाव में पुरजोर तरीके से उठाया और इसे अपने मैनिफेस्टो में भी शामिल किया. कांग्रेस को इसका लाभ मिला है और सी वोटर एग्जिट पोल के अनुमान बताते हैं कि किसान, जाट वोट पार्टी के साथ गया है.
2- पहलवान
बीजेपी के पूर्व सांसद और डब्ल्यूएफआई के तत्कालीन प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों के आंदोलन को मुद्दा बनाया. पहलवान आंदोलन का चेहरा रहीं विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया चुनावों के बीच कांग्रेस में शामिल हो गए. विनेश हालिया पेरिस ओलंपिक में फाइनल तक पहुंची थीं लेकिन गोल्ड मेडल मैच से पहले वजन सौ ग्राम अधिक होने की वजह से उन्हें अयोग्य ठहरा दिया गया था. विनेश के कांग्रेस में जाने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने उन्हें निशाने पर लिया, अयोग्यता को लेकर भी बयान दिए जिसका नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ा है. विनेश को कांग्रेस ने जुलाना सीट से उम्मीदवार बनाया था.
3- खाप
कांग्रेस को खाप का भी समर्थन मिला है. विनेश फोगाट की पेरिस ओलंपिक फाइनल से पहले अयोग्यता के बाद खाप उनके समर्थन में खुलकर खड़े हो गए थे. किसी खाप ने गदा तो किसी खाप ने गोल्ड मेडल से सम्मानित भी किया. विनेश की अयोग्यता के बाद उनके समर्थन में खापों में एक भावनात्मक लहर थी. खाप, जाट समाज की व्यवस्था में अहम स्थान रखते हैं और कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में सीएम पद के मजबूत दावेदार माने जा रहे भूपेंद्र हुड्डा भी इसी समाज से आते हैं.
हरियाणा की कुल आबादी में जाट समाज की अनुमानित भागीदारी 25 फीसदी के करीब है. जाट अस्मिता, एमएसपी की लीगल गारंटी के वादे और किसान-पहलवान आंदोलन से उपजी नाराजगी से जाट वोटबैंक का बड़ा हिस्सा कांग्रेस के साथ जाने के अनुमान जताए जा रहे थे. सी वोटर एग्जिट पोल के अनुमान अगर वास्तविक चुनाव नतीजों में बदलते हैं तो यह इस बात का भी संकेत है कि कांग्रेस को खाप का भी अच्छा समर्थन मिला है.
4- नौजवान
देश की कुल आबादी में पांच फीसदी से भी कम की भागीदारी रखने वाला हरियाणा सेना में बड़ी हिस्सेदारी रखता है. सेना के करीब 10 फीसदी जवान हरियाणा से आते हैं जो सेना को लेकर सूबे की जनता का क्रेज बताता है. हरियाणा चुनाव में इस बार बेरोजगारी के साथ ही कांग्रेस ने अग्निवीर को भी मुद्दा बनाया. बीजेपी ने हरियाणा के हर अग्निवीर को स्थायी सरकारी नौकरी की गारंटी का वादा किया, रैलियों में वरिष्ठ नेताओं ने भी यह बार-बार दोहराया. एग्जिट पोल अनुमान अगर नतीजों में बदलते हैं तो यह इस बात का संकेत होगा कि बीजेपी को सेना भर्ती की अग्निवीर योजना की वजह से नुकसान उठाना पड़ा है, कांग्रेस को फायदा मिला है.
5- एंटी इनकम्बेंसी
हरियाणा में पिछले 10 साल से बीजेपी की सरकार है. विधानसभा चुनाव के लिए कार्यक्रम के ऐलान से पहले करीब दो महीने पहले बीजेपी ने मनोहरलाल खट्टर की जगह नायब सिंह सैनी को सीएम बनाया था. परिवार कार्ड से लेकर तमाम योजनाओं के पोर्टल को लेकर भी लोगों में नाराजगी की चर्चा थी. निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के कामकाज को लेकर भी लोग नाराज बताए जा रहे थे. 10 की एंटी इनकम्बेंसी के बावजूद लगातार तीसरी बार सरकार रिपीट करा पाना किसी भी दल के लिए किसी भी राज्य में आसान नहीं होता. सी वोटर के एग्जिट पोल अनुमान भी इसी तरफ इशारा करते हैं. एग्जिट पोल अनुमान अगर वास्तविक नतीजों में बदलते हैं तो ऐसे परिणाम के पीछे एंटी इनकम्बेंसी भी बड़ा फैक्टर हो सकता है.
एक चरण में हुआ मतदान
हरियाणा विधानसभा की सभी 90 सीटों के लिए एक चरण में 5 अक्टूबर को वोट डाले गए. मतदान के अंतिम आंकड़े अभी नहीं आए हैं. हरियाणा चुनाव में किसान, पहलवान और जवान मुद्दा बने. किसान और जाट नाराज बताए जा रहे थे, वहीं बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों के आंदोलन को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस सत्ताधारी बीजेपी पर हमलावर नजर आई. हरियाणा चुनाव में सीएम नायब सिंह सैनी, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, रेसलर से राजनेता बनीं विनेश फोगाट, चित्रा सरवारा, अनिल विज जैसे बड़े चेहरों की किस्मत दांव पर है. भव्य बिश्नोई, चंद्रमोहन बिश्नोई, आदित्य सुरजेवाला भी हरियाणा चुनाव के चर्चित चेहरों में शामिल हैं.