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हरियाणा विधानसभा चुनाव: आसान नहीं CM सैनी की राह? जानें- लाडवा विधानसभा सीट का हाल

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी इस बार लाडवा से चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के मौजूदा विधायक मेवा सिंह और इनेलो-बसपा उम्मीदवार सपना बरशामी की चुनौती के कारण उनके लिए यह लड़ाई आसान नहीं लग रही. जातिगत समीकरण और किसानों की नाराजगी इस चुनाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी इस बार लाडवा से चुनावी मैदान में हैं.
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी इस बार लाडवा से चुनावी मैदान में हैं.

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी इस बार लाडवा विधानसभा सीट से चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं. लेकिन यहां की चुनावी जंग उनके लिए आसान नहीं दिख रही. पिछले चार चुनावों में उन्होंने अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ा है. वो पहले नरायणगढ़ से विधायक, फिर कुरुक्षेत्र से सांसद, और फिर करनाल से विधायक बने. इस विधानसभा चुनाव में उन्होंने लाडवा को चुना है, जहां सैनी समुदाय के 35,000 से अधिक वोट उनकी जीत के लिए अहम माने जा रहे हैं.

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हालांकि, कांग्रेस के मौजूदा विधायक मेवा सिंह ने इस बार उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. मेवा सिंह, जिन्होंने 2019 के चुनाव में 12,000 वोटों से जीत हासिल की थी, कहते हैं, 'नायब सैनी ने कुरुक्षेत्र से सांसद रहते और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी लाडवा के लिए कुछ नहीं किया. जनता उन्हें इस बार नकार देगी.' उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सैनी के लिए इस बार अपनी जमानत बचाना भी मुश्किल हो जाएगी.

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा, 'लाडवा में हमारी स्थिति मजबूत है और 8 अक्टूबर को सभी को भाजपा की ताकत का अंदाजा हो जाएगा.' भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी सैनी का समर्थन करते हुए कहा कि नायब सैनी इस बार लाडवा से जरूर जीतेंगे, भले ही कुछ सर्वे इसके विपरीत कह रहे हों.'

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इनेलो-बसपा गठबंधन की उम्मीदवार सपना बरशामी भी इस मुकाबले में जोर-शोर से प्रचार कर रही हैं. सपना ने कहा, 'हम इस क्षेत्र से लंबे समय से जुड़े हैं और यहां के लोग हमें पहचानते हैं. इस बार जनता हमें जरूर समर्थन देगी.' सपना ने 2019 में भी लाडवा से चुनाव लड़ा था, लेकिन तब वह तीसरे स्थान पर रहीं. जबकि, कांग्रेस के मेवा सिंह ने भाजपा के पवन सैनी को हराकर जीत हासिल की थी. 

स्थानीय लोगों और किसानों की नाराजगी
  
लाडवा के कई निवासियों का कहना है कि नायब सैनी ने न सांसद रहते हुए और न ही मुख्यमंत्री बनने के बाद क्षेत्र के लिए कोई काम किया. एक किसान ने कहा, 'सरकार ने हमारी फसल की खरीद और उठान के लिए कुछ नहीं किया. मंडी में धान के ढेर लगे हैं, लेकिन उठान नहीं हो रहा. ये सरकार की जिम्मेदारी नहीं है तो किसकी है?' एक अन्य किसान ने सैनी पर आरोप लगाया कि उन्होंने केवल चुनावी लाभ के लिए क्षेत्रों को बदला और लाडवा के विकास की अनदेखी की.

जातिगत समीकरण का असर

लाडवा में जातिगत समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. कांग्रेस के मेवा सिंह को जाट और जट सिख वोटों का समर्थन मिलने की उम्मीद है, जबकि मुख्यमंत्री सैनी अपने समुदाय के सैनी वोटों पर नजर रखे हुए हैं. लाडवा विधानसभा में कुल 1.83 लाख मतदाता हैं, जिनमें 42 हजार जाट और जट सिख, 39 हजार सैनी, 37 हजार ओबीसी, 7 हजार पंजाबी खत्री, 11 हजार मुस्लिम और 5 हजार बनिया वोट शामिल हैं. 

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पिछले चुनाव परिणाम

2019: कांग्रेस के मेवा सिंह ने सीट जीती  
2014: भाजपा के पवन सैनी विजेता बने  
2009: इनेलो के शेर सिंह बरशामी ने जीत दर्ज की थी  

लाडवा की जनता का फैसला तो 8 अक्टूबर को सामने आएगा, लेकिन इस बार की चुनावी जंग बेहद दिलचस्प होती दिख रही है.

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