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मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नायब सैनी पर दांव लगाना भी नहीं आया काम... हरियाणा में Exit Poll से क्या निकला

राज्य में मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नायब सैनी को सीएम बनाने का बीजेपी का दांव भी फेल होता नजर आ रहा है. कारण, एग्जिट पोल में बीजेपी की सत्ता से विदाई हो रही है और राज्य में कांग्रेस बहुमत हासिल कर रही है. सी वोटर के एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को 20 से 28 सीट मिलने का अनुमान है तो वहीं कांग्रेस को 50 से 58 सीट मिलने का अनुमान है. जजेपी को 0-2 और अन्य को 10 से 14 सीटें मिल रही हैं.

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मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नायब सैनी को बीजेपी ने सीएम बनाया था (फाइल फोटो)
मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नायब सैनी को बीजेपी ने सीएम बनाया था (फाइल फोटो)

हरियाणा का विधानसभा चुनाव शनिवार को संपन्न हो गया. इसी के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस की विनेश फोगट के अलावा जेजेपी के दुष्यंत चौटाला समेत 1027 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. इस बार सत्तारूढ़ भाजपा राज्य में जीत की हैट्रिक लगाने की आस लगाए बैठी है, जबकि कांग्रेस एक दशक बाद वापसी का दावा कर रही है. 8 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं. लेकिन इससे पहले एग्जिट पोल जारी हो गए हैं. 

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राज्य में मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नायब सैनी को सीएम बनाने का बीजेपी का दांव भी फेल होता नजर आ रहा है. कारण, एग्जिट पोल में बीजेपी की सत्ता से विदाई हो रही है और राज्य में कांग्रेस बहुमत हासिल कर रही है. सी वोटर के एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को 20 से 28 सीट मिलने का अनुमान है तो वहीं कांग्रेस को 50 से 58 सीट मिलने का अनुमान है. जजेपी को 0-2 और अन्य को 10 से 14 सीटें मिल रही हैं. 2019 के पिछले विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने 40 सीटें जीती थीं, कांग्रेस ने 31 और जेजेपी ने 10 सीटें जीती थीं. लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आ रही है.

चुनाव के वोट प्रतिशत की बात करें तो एग्जिट पोल में बीजेपी को 37 फीसदी, कांग्रेस को 44, जेजेपी को 4 तो अन्य को 15 फीसदी वोट मिले हैं. हालांकि इसके बाद भी बीजेपी राज्य में सरकार बनाने का दावा कर रही है. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व गृह मंत्री अनिल विज ने आजतक से बात करते हुए कहा कि बीजेपी 8 अक्टूबर को राज्य में सरकार बनाने जा रही है.

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केंद्र की राजनीति का हरियाणा में बीजेपी को नुकसान: विशेषज्ञ 

राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक नायब सैनी के आने से पहले ही बीजेपी को नुकसान पहुंच चुका था. यही कारण है कि बीजेपी की सीएम बदलने की योजना कामयाब नहीं हो सकी. इसके पीछे का कारण है कि केंद्र की राजनीति का शिकार हरियाणा बीजेपी हुई है. जिस तरह से मनमोहन सरकार की वजह से दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार को नुकसान हुआ, उसी तरह अब हरियाणा में बीजेपी को नुकसान हुआ. किसान आंदोलन, अग्निवीर और महिला पहलवान के मुद्दों के अलावा राज्य में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा बन गई. 

बीजेपी का वोट छिटककर कांग्रेस के पास पहुंचा

उन्होंने कहा कि मनोहर लाल खट्टर का भी व्यवहार नहीं बदला सीएम पद हटने के बाद भी. वो लोगों के बीच उस तरह से नहीं पहुंचे और लोगों का दिल नहीं जीत पाए. इसलिए ये सरकार को सोचने की जरूरत है कि पिछले पांच वर्षों में जिस तरह की पॉलिसी अपनाई गईं, कहीं ये उसका परिणाम तो नहीं. कांग्रेस को जाट के अलावा अन्य जातियों के वोटों का समर्थन भी बड़े स्तर पर मिला है. वहीं बीजेपी अपने जाट वोट को संभालने में नाकामयाब रही. इसी का नुकसान पार्टी को हो रहा है. राज्य के जाटलैंड की 17 सीटों पर भी कांग्रेस को करीब 16 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं बीजेपी महज चार सीटों तक सिमित नजर आ रही है. बीजेपी की हार का सबसे बड़ा कारण जाट के अलावा अन्य जातियों के वोटों का छिटकना भी है.  

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कौन दिग्गज किस सीट से मैदान में

मैदान में उतरने वालों में प्रमुख लोगों में मुख्यमंत्री सैनी (लाडवा), विपक्ष के नेता हुड्डा (गढ़ी सांपला-किलोई), इनेलो के अभय सिंह चौटाला (ऐलनाबाद), जेजेपी के दुष्यंत चौटाला (उचाना कलां), भाजपा के अनिल विज (अंबाला कैंट), कैप्टन अभिमन्यु (नारनौंद) और ओपी धनखड़ (बादली), आप के अनुराग ढांडा (कलायत) और कांग्रेस के फोगाट (जुलाना) शामिल हैं. तोशाम सीट से बीजेपी की पूर्व सांसद श्रुति चौधरी और अनिरुद्ध चौधरी दोनों चचेरे भाई चुनाव लड़ रहे हैं.

डबवाली से देवीलाल के पोते और इनेलो उम्मीदवार आदित्य देवीलाल का मुकाबला पूर्व उपप्रधानमंत्री के परपोते जेजेपी के दिग्विजय सिंह चौटाला से है. भाजपा ने हिसार के आदमपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजन लाल के पोते भव्य बिश्नोई को मैदान में उतारा है, जबकि महेंद्रगढ़ के अटेली से आरती राव को उम्मीदवार बनाया है, जिनके पिता राव इंद्रजीत सिंह केंद्रीय मंत्री हैं.

निर्दलीय उम्मीदवारों में सावित्री जिंदल (हिसार), रणजीत चौटाला (रानिया) और चित्रा सरवारा (अंबाला कैंट) शामिल हैं. उचाना से दुष्यंत के खिलाफ कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह मैदान में हैं, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं. कांग्रेस और भाजपा दोनों से कुछ बागी भी मैदान में उतरे हैं.

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