महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मध्य मुंबई की दादर-माहिम सीट चर्चा में है. यहां से MNS प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे चुनावी राजनीति में डेब्यू करने जा रहे हैं. इस सीट पर तीनों सेना (शिवसेना, शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) के बीच मुकाबला है. हालांकि, बीजेपी ने महायुति से अमित का समर्थन किए जाने की अपील की है. इस बीच, आजतक से बातचीत में अमित ठाकरे ने चुनावी रणनीति से लेकर परिवार के मुद्दे पर खुलकर बात की है.
दरअसल, माहिम सीट से उद्धव ठाकरे खेमे से महेश सावंत, शिंदे खेमे से सदा सरवणकर और MNS से अमित ठाकरे मैदान में हैं. अमित ने सोमवार को नामांकन कर दिया है. अमित कहते हैं कि वो शिवसेना के दोनों खेमों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं. आजतक को दिए इंटरव्यू में अमित ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने पिता से कहा है कि वे मेरी जीत को आसान बनाने के लिए किसी भी प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार से समझौता ना करें. साथ ही अमित ठाकरे ने बताया कि राज ठाकरे का फोकस सिर्फ माहिम क्षेत्र में ही नहीं होगा, बल्कि वे पूरे महाराष्ट्र में प्रचार करेंगे.
'मुझे नहीं पता था लिस्ट में नाम आएगा?'
अमित कहते हैं कि उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होने तक उन्हें अपने टिकट के बारे में जानकारी नहीं थी. अमित ने कहा, मुझे अंत तक पता नहीं था कि मेरा नाम लिस्ट में आएगा. मुझे यह भी अंदाजा नहीं था कि घरेलू मैदान माहिम से उतारा जाएगा. MNS चीफ (राज ठाकरे) ने मुझसे सिर्फ एक ही बात पूछी थी कि क्या वो चुनावी राजनीति में उतरने के लिए तैयार हैं? क्योंकि इससे मेरा जीवन पूरी तरह से बदल जाएगा.
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'राज साहब का बेटा समझकर वोट मत देना...'
अमित ने स्पष्ट किया कि वो चुनाव में अपना 100 प्रतिशत देंगे. भले ही कोई प्रतिद्वंदी उम्मीदवार हो. अमित का कहना था कि मैं लोगों से भी कहना चाहता हूं कि मुझे सिर्फ यह सोचकर वोट मत देना कि मैं राज ठाकरे का बेटा हूं, बल्कि मेरे काम और पहचान के आधार पर मूल्यांकन करें और सहयोग-समर्थन करें.
अमित ठाकरे ने नामांकन से पहले मंदिर में मत्था टेका...Video
'महायुति से उठी अमित को समर्थन देने की मांग'
दरअसल, माहिम सीट से शिवसेना से सदा सरवणकर सिटिंग विधायक हैं. शिवसेना ने उन्हें फिर से उम्मीदवार घोषित किया है. हालांकि, मुंबई बीजेपी अध्यक्ष आशीष शेलार ने महायुति से अमित का समर्थन किए जाने की मांग की है. अब खबर है कि विधायक सदा सरवणकर की मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस और राज ठाकरे से बात हुई है. संभव है कि तीनों नेताओं के बीच विचार-विमर्श के बाद शिवसेना, अमित के लिए मैदान छोड़ देगी.
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'2017 से आदित्य से बातचीत नहीं'
अमित ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने अपने चचेरे भाई और पूर्व कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे से 2017 के बाद से बातचीत नहीं की है. दरअसल, साल 2017 में बीएमसी में अपनी संख्या बढ़ाने के लिए शिवसेना ने मनसे के 7 पार्षदों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल करवा लिया था, तब से मनसे, शिवसेना से खफा है. उस समय अमित अपनी गंभीर बीमारी का इलाज करवा रहे थे.
'चुनाव जीते तो क्षेत्र की सूरत बदल देंगे'
हालांकि, अमित ठाकरे ने कहा, अगर लोग उन्हें चुनते और मौका देते हैं तो वे अपने क्षेत्र की सूरत बदल देंगे. अमित कहते हैं कि वो विशेषकर बच्चों और सीनियर सिटिजन के लिए काम करना चाहते हैं. साथ ही वो अपने पिता की तरह ही मराठी गौरव और हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ाना चाहते हैं.