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जम्मू कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों के लिए तीन चरणों में वोट डाले गए थे. अंतिम चरण की वोटिंग 1 अक्टूबर को हुई थी और चुनाव नतीजे 8 अक्टूबर को आने हैं लेकिन वास्तविक नतीजों से पहले एग्जिट पोल के अनुमान आ गए हैं. सी वोटर के सर्वे में जम्मू कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन की सरकार के अनुमान जताए गए हैं.
जम्मू कश्मीर में इस एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन को 40 से 48, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 27 से 32 और महबूबा मुफ्ती की अगुवाई वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को 6 से 12 सीटें मिल सकती हैं. अन्य को भी 6 से 11 सीटें मिलने के अनुमान जताए गए हैं.
एग्जिट पोल के अनुमान अगर वास्तविक नतीजों में बदलते हैं तो बीजेपी के मजबूत गढ़ जम्मू रीजन में कांग्रेस-एनसी गठबंधन सेंध लगाता नजर आ रहा है. जम्मू रीजन की बात करें तो बीजेपी को सबसे ज्यादा उम्मीदें इसी रीजन से थीं. जम्मू रीजन में कुल 43 सीटें हैं. पिछली बार बीजेपी ने जो 25 विधानसभा सीटें जीती थीं, वह सभी सीटें इसी रीजन की थीं. तब जम्मू रीजन में 37 सीटें हुआ करती थीं. इस बार सीटें तो बढ़ीं लेकिन बीजेपी को इसका उतना फायदा मिलता नहीं दिख रहा. एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को इस रीजन में 41 फीसदी वोट शेयर के साथ 27 से 31 सीटें मिल सकती हैं.
जम्मू रीजन की फाइट कभी कांग्रेस और पैंथर्स पार्टी के बीच रहा करती थी और एनसी, पीडीपी जैसी घाटी की पार्टियों का प्रभाव पिछले कुछ चुनावों, खासकर 21वीं सदी में ना के बराबर रहा है. इस रीजन में इस बार कांग्रेस और एनसी गठबंधन को 11 से 15 सीटें मिलने का अनुमान है. सी वोटर एग्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस-एनसी गठबंधन 36 फीसदी वोट शेयर मिलता दिख रहा है.
90 सीटों पर तीन चरणों में हुआ करीब 64 फीसदी मतदान
जम्मू कश्मीर में विधानसभा की कुल 90 सीटें हैं. प्रदेश से केंद्र शासित प्रदेश बने जम्मू कश्मीर की 90 सीटों के लिए तीन चरणों में वोट डाले गए. पहले चरण में 18 सितंबर को 24 सीटों पर मतदान हुआ था. दूसरे चरण में 26 सीटों पर वोटिंग हुई थी. तीसरे और अंतिम चरण में 1 अक्टूबर को 40 सीटों के लिए वोट डाले गए थे. सूबे में कुल मिलाकर 63.88 फीसदी मतदान हुआ है. चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण की 24 सीटों पर 61.38, दूसरे चरण की 26 सीटों पर 57.31 फीसदी और तीसरे चरण की 40 सीटों पर 69.69 फीसदी वोटिंग हुई. वोटिंग को लेकर महिलाओं में जबरदस्त उत्साह नजर आया. 69.37 फीसदी पुरुषों के मुकाबले कहीं अधिक 70.02 फीसदी महिलाओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया.
क्या रहे मेन फैक्टर, मुद्दे और चेहरे
जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव के दौरान अनुच्छेद 370 और 35 ए के साथ ही शांति, सुरक्षा और विकास मेन फैक्टर रहे. सीमावर्ती केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के साथ ही महबूबा मुफ्ती की अगुवाई वाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और घाटी की अन्य पार्टियां भी जम्मू कश्मीर राज्य का दर्जा बहाल करने को चुनावी मुद्दा बनाया. कांग्रेस को छोड़कर करीब-करीब हर दल अनुच्छेद 370 को वापस लाने की बात करता दिखा.
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चेहरों की बात करें तो इस चुनाव में मुफ्ती परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने चुनावी राजनीति में कदम रखा. बारामूला सीट से बतौर निर्दलीय मिली जीत से उत्साहित इंजीनियर राशिद की पार्टी ने भी घाटी की कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे. सज्जाद लोन की पार्टी के साथ ही अपनी पार्टी जैसे दल भी चुनाव मैदान में उतरे. प्रमुख चेहरों की बात करें तो संसद हमलों के दोषी अफजल गुरु के भाई एजाज गुरु, सैयद सलीम गिलानी, डॉक्टर तलत मजीद, सर्जन बरकती, आगा सैय्यद मुंतजिर जैसे चेहरे चुनाव मैदान में हैं.
कैसे रहे थे 2014 चुनाव के नतीजे
जम्मू कश्मीर में 10 साल पहले आखिरी बार विधानसभा चुनाव हुए थे और तब यह राज्य हुआ करता था. जम्मू कश्मीर विधानसभा में 87 सीटें हुआ करती थीं. 37 सीटें जम्मू, 46 कश्मीर घाटी और चार सीटें लद्दाख रीजन में थीं. तब जम्मू कश्मीर में 65 फीसदी मतदान हुआ था और 22.7 फीसदी वोट शेयर के साथ पीडीपी 28 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी.
बीजेपी को सबसे ज्यादा 23 फीसदी वोट मिले थे लेकिन पार्टी 25 सीटें जीतकर पीडीपी के बाद दूसरे नंबर पर रही थी. डॉक्टर फारुक अब्दुल्ला की अगुवाई वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस को 20.8 फीसदी वोट शेयर के साथ 15, कांग्रेस को 18 फीसदी वोट शेयर के साथ 12, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस 1.9 फीसदी वोट शेयर के साथ दो सीटों पर जीत मिली थी. सीपीआईएम एक फीसदी से भी कम वोट शेयर के साथ एक सीट जीतने में सफल रही थी. तब पीडीएफ के एक और तीन निर्दलीय उम्मीदवार भी विधानसभा पहुंचने में सफल रहे थे. किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था.