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झारखंड चुनाव: कौन हैं जयराम महतो जो NDA और INDIA गठबंधन के बन सकते हैं चुनौती

झारखंड विधानसभा चुनाव में जयराम महतो की पार्टी JLKM तेजी से उभर रही है. कुर्मी वोटों पर उनकी मजबूत पकड़ NDA और INDIA गठबंधनों के लिए चुनौती बन सकती है, जिससे चुनाव के नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं.

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जयराम महतो झारखंड विधानसभा चुनाव में वह एक बड़ा फैक्टर साबित हो सकते हैं. (फोटो: फेसबुक)
जयराम महतो झारखंड विधानसभा चुनाव में वह एक बड़ा फैक्टर साबित हो सकते हैं. (फोटो: फेसबुक)

झारखंड विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और राजनीतिक माहौल हर दिन गरमाता जा रहा है. 13 और 20 नवंबर को राज्य में दो चरणों में मतदान होगा, जबकि 23 नवंबर को नतीजे सामने आएंगे. चुनावी जंग में इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है. लेकिन इन दो प्रमुख दलों के अलावा एक तीसरी ताकत भी तेजी से उभरकर सामने आ रही है - झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM), जिसका नेतृत्व कर रहे हैं युवा नेता जयराम महतो. 

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जयराम महतो का उदय: नया राजनीतिक समीकरण

झारखंड की राजनीति में जातिगत समीकरण हमेशा से अहम रहे हैं. राज्य में 15% से अधिक कुर्मी मतदाता हैं, जो आदिवासी समुदाय के बाद सबसे बड़ी और प्रभावशाली जाति मानी जाती है. जयराम महतो खुद कुर्मी समुदाय से आते हैं और इसी वोट बैंक पर उनकी नजरें टिकी हैं. अपने जनाधार को लगातार बढ़ाते हुए जयराम महतो अब झारखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चेहरा बनकर उभरे हैं. 

गिरिडीह लोकसभा सीट से 2024 में भले ही वह चुनाव नहीं जीत पाए, लेकिन 3 लाख 47 हजार 322 वोट हासिल कर उन्होंने अपने राजनीतिक कद का अहसास करा दिया था. जयराम महतो की यह बढ़त अब राज्य की विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकती है, खासकर कुर्मी बहुल इलाकों में. 

2024 लोकसभा चुनाव में JLKM का प्रदर्शन

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झारखंड लोकसभा चुनाव में JLKM ने 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. इनमें गिरिडीह, रांची, हजारीबाग, कोडरमा और धनबाद जैसी प्रमुख सीटें शामिल थीं. हालांकि पार्टी को कोई सीट जीतने में सफलता नहीं मिली, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा. 

उदाहरण के तौर पर, रांची से देवेंद्र नाथ महतो ने 1,32,647 वोट प्राप्त किए, जबकि हजारीबाग से संजय कुमार मेहता ने 1,57,977 वोट हासिल किए. कुल मिलाकर JLKM ने इन आठ सीटों पर 8,03,069 वोट जुटाए, जो दिखाता है कि पार्टी ने जनता के बीच अपनी जगह बना ली है.

2024 लोकसभा में JLKM उम्मीदवारों का प्रदर्शन

NDA और INDIA गठबंधन के लिए खतरे की घंटी

जयराम महतो का तेजी से बढ़ता कद NDA और INDIA गठबंधनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है. गिरिडीह सीट जो NDA के तहत AJSU पार्टी के हिस्से में आई, और INDIA गठबंधन में JMM को, वहां जयराम महतो को मिले भारी समर्थन ने दोनों गठबंधनों की चिंता बढ़ा दी है. JLKM इस बार 71 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जिनमें से जयराम महतो खुद दो सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं, जिनमें दुमरी सीट प्रमुख है.

जयराम महतो का प्रभाव खासकर कुर्मी बहुल सीटों पर देखने को मिल सकता है. गिरिडीह, धनबाद, हजारीबाग, रांची, और कोडरमा जैसे क्षेत्रों में उनका जनाधार मजबूत हो रहा है. JLKM की मजबूत उपस्थिति से BJP और JMM जैसी स्थापित पार्टियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. 

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कुर्मी वोट बैंक: चुनावी समीकरण का केंद्र

झारखंड की राजनीति में कुर्मी वोटों की अपनी अलग अहमियत है. राज्य के लगभग 15% मतदाता कुर्मी समुदाय से आते हैं, जो विधानसभा की 32-35 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं. सिली, रामगढ़, मांडू, गोमिया, डुमरी, और ईचागढ़ जैसी सीटों पर कुर्मी मतदाता बहुसंख्यक हैं और यहां जयराम महतो की पार्टी का प्रभाव इन सीटों के नतीजों को उलट-पलट सकता है. 

यह भी ध्यान देने योग्य है कि AJSU पार्टी के अध्यक्ष सुदेश महतो भी कुर्मी समुदाय से आते हैं, लेकिन अब जयराम महतो उनके वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी तैयारी में हैं. जयराम महतो और सुदेश महतो दोनों की राजनीतिक पृष्ठभूमि छात्र राजनीति से है, लेकिन जयराम महतो की मजबूत पकड़ ने उन्हें AJSU और BJP के लिए एक बड़ा चुनौती बना दिया है. 

अगर JLKM कुर्मी वोटों में सेंध लगा पाती है, तो झारखंड विधानसभा चुनावों के नतीजे बेहद चौंकाने वाले हो सकते हैं. 

JLKM की ताकत: स्थानीय मुद्दों पर पकड़

जयराम महतो की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत उनकी स्थानीय मुद्दों पर पकड़ और जनता से सीधा जुड़ाव है. उनका दावा है कि सिर्फ वही लोग झारखंडी कहलाएंगे, जो 1932 के खतियान के आधार पर यहां के मूल निवासी माने जाएंगे. इस मुद्दे को लेकर उन्होंने लगातार आंदोलन चलाया है, जिससे उन्हें स्थानीय जनता, खासकर युवाओं के बीच भारी समर्थन मिला है.

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वह लगातार झारखंड के प्रतियोगी परीक्षाओं में स्थानीय भाषाओं के इस्तेमाल और स्थानीय युवाओं को रोजगार के मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं. उनके इसी रुख के चलते युवाओं में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है और JLKM का जनाधार मजबूत हुआ है. 

कौन हैं जयराम महतो?

जयराम महतो का जन्म 27 दिसंबर 1994 को धनबाद जिले के मंतंद गांव में हुआ. उन्होंने अपनी पढ़ाई कोयलांचल विश्वविद्यालय से की और पिछले चार साल से भाषा, स्थानीयता और रोजगार के मुद्दों पर आंदोलन कर रहे हैं. 

झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति (JBKSS) के नाम से उन्होंने 2023 में एक पार्टी का गठन किया, जो अब झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के रूप में जानी जाती है. जयराम महतो झारखंड की राजनीति में तेजी से उभरते नेता हैं और विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी की बड़ी भूमिका देखने को मिल सकती है.

चुनावी समीकरण पर जयराम महतो का असर

झारखंड के इस विधानसभा चुनाव में जयराम महतो की पार्टी JLKM एक अहम भूमिका निभाने वाली है. कुर्मी बहुल सीटों पर उनकी पार्टी का प्रभाव NDA और INDIA गठबंधनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है. खासकर कुर्मी वोट बैंक में सेंध लगने से राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. जयराम महतो के उभार ने झारखंड की राजनीति के समीकरणों को बदलने की पूरी तैयारी कर ली है, और अब देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा चुनावों में इसका क्या असर पड़ता है.

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