जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और J-K नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसीडेंट फारूक अब्दुल्ला ने ऐलान किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. शाम को गठबंधन का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा.
जम्मू-कश्मीर में 20 अगस्त से विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई. पहले चरण की वोटिंग के लिए अधिसूचना जारी हो गई है. नामांकन भरने की अंतिम तारीख 27 अगस्त निर्धारित की गई है. 10 साल के लंबे इंतजार के बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं. पहले चरण के लिए 18 सितंबर को वोटिंग होनी है. जिसमें 24 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा.
एक-दो दिन में हो सकता है उम्मीदवारों का ऐलान
18 सितंबर को होने वाले पहले चरण के मतदान में 24 सीटों पर वोटिंग होनी है. इसमें 16 सीटें कश्मीर घाटी की है, जबकि 8 सीटें जम्मू इलाके की हैं. एक या दो दिन में पार्टी अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर सकती हैं. 90 सीटों के लिए तीन चरण के विधानसभा चुनाव का परिणाम 4 अक्टूबर को जारी होगा.
2014 में हुआ था आखिरी विधानसभा चुनाव
जम्मू और कश्मीर में 2014 के बाद ये पहला विधानसभा चुनाव होगा. 2014 में सूबे की 87 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले गए थे. तब पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी 28 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. वहीं, बीजेपी को 25 सीटों पर जीत मिली थी. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती थीं.
चुनाव नतीजों में कोई भी दल बहुमत के लिए तब जरूरी 44 सीट के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच सका था. चुनाव नतीजों के ऐलान के बाद पहले और दूसरे नंबर पर रही पार्टियों पीडीपी और बीजेपी ने गठबंधन कर सरकार मुफ्ती मोहम्मद सईद की अगुवाई में सरकार बनाई थी.
बीजेपी के सामने क्या चुनौतियां?
जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के सामने एक बड़ी चुनौती स्थानीय पार्टियां और कांग्रेस है, जिसका स्थानीय स्तर पर बीजेपी की तुलना में पैठ अच्छी है. कांग्रेस का प्लान है कि वो जम्मू डिवीजन में बीजेपी को 20 सीटों पर समेट दे, ताकि विधानसभा में स्थानीय पार्टियों के साथ सरकार में शामिल हो सके.
बीजेपी को लेकर कई बार स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखा गया है. हालांकि, हाल के महीनों में इसमें बदलाव भी हुआ है, जहां कई स्थानीय नेताओं ने पार्टी का झंडा उठाया. अगर कांग्रेस जम्मू डिवीजन में कुछ सीटें जीतने में कामयाब होती है तो बीजेपी का सरकार बनाने का सपना चकनाचूर हो सकता है.