scorecardresearch
 

झारखंड चुनाव: बीजेपी के सीपी सिंह के खिलाफ JMM ने रांची से महुआ माजी को उतारा

झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 को लेकर झारखंड मुक्ती मोर्चा (जेएमएम) ने अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है. पार्टी ने राज्यसभा सांसद महुआ माजी को रांची से टिकट दिया है.

Advertisement
X
महुआ माजी
महुआ माजी

झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 को लेकर झारखंड मुक्ती मोर्चा (जेएमएम) ने अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है. जिसके अनुसार राज्यसभा सांसद महुआ माजी रांची से चुनाव लड़ेंगी. उन्हें भाजपा के दिग्गज नेता सीपी सिंह के खिलाफ खड़ा किया गया है. ऐसे में रांची सीट पर चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है.

Advertisement

इससे पहले झारखंड चुनाव के लिये हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने 35 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी. इस लिस्ट में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ-साथ उनकी पत्नी कल्पना सोरेन का नाम भी शामिल था.

यह भी पढ़ें: झारखंड चुनाव: INDIA में लगी सीट शेयरिंग पर मुहर!

राज्य के मुख्यमंत्री और JMM चीफ हेमंत सोरेन बरहेट सीट से चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं तो वहीं उनकी पत्नी कल्पना सोरेन गांडेय सीट से चुनाव लड़ेंगी. जेएमएम की दूसरी लिस्ट में तीन मुस्लिम प्रत्याशियों को भी टिकट दिया गया है.

राज्य में दो चरणों में होगी वोटिंग

झारखंड में दो चरणों में मतदान होगा और 23 नवंबर को नतीजे आएंगे. पहले चरण में 13 नवंबर को 43 सीटों पर वोटिंग होगी और दूसरे चरण में 20 नवंबर को 38 सीटों पर मतदान होगा. इसके बाद 23 नवंबर को मतगणना होगी. चुनाव आयोग के मुताबिक, झारखंड में कुल मतदाता की संख्या 2,55,18,642 हैं, जिसमें पुरुष मतदाता की संख्या 1,29,97,325 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 1,25,20,910 है. यानी महिलाओं की सहभागिता बढ़ी है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: झारखंड चुनाव के लिए राजद ने जारी की 6 उम्मीदवारों की लिस्ट, जेल से चुनाव लड़ेंगे सुभाष यादव

झारखंड में 81 सीटों पर होना है चुनाव

झारखंड विधानसभा चुनाव राज्य विधानसभा के सभी 81 सदस्यों का चुनाव करने के लिए नवंबर या दिसंबर 2024 में होगा. झारखंड विधानसभा का कार्यकाल 5 जनवरी 2025 को समाप्त होने वाला है. पिछला विधानसभा चुनाव दिसंबर 2019 में हुआ था. झारखंड में इंडिया ब्लॉक के घटकों में जेएमएम सबसे ज्यादा करीब 40 सीटों पे चुनाव लड़ रही है. जेएमएम का गढ़ हमेशा से संथाल परगना रहा है. यहीं से गुरुजी यानी पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर शुरू हुआ था और यहीं से उन्होंने महाजनों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था.

संताल परगना को झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का गढ़ कहा जाता है. शिबू सोरेन के राजनीतिक सफर की शुरुआत रामगढ़, धनबाद, टुंडी से हुई लेकिन वे उतने सफल नहीं हो पाए. 1977 में टुंडी में विधानसभा चुनाव लड़ा और हार गए. उसके बाद शिबू सोरेन संथाल परगना का रुख किया. संथाल परगना में आने पर उन्हें सियासी प्राण मिला. यहीं उन्हें दिशोंम गुरु की उपाधि मिली. 

यह भी पढ़ें: रांची दौरे पर राहुल गांधी की सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात

संथाल परगना को उन्होंने अपनी राजनीति का केंद्र बनाया. यहां उनका जादू ऐसा चला कि मात्र ढाई साल के बाद 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के किले को ध्वस्त कर दुमका से जीत दर्ज की. शिबू सोरेन ने संथाल परगना में महाजनों और सूदखोरों के खिलाफ लंबा संघर्ष छेड़ा था. यह संघर्ष धान कटनी आंदोलन के नाम से चर्चित हुआ था. इस आंदोलन में ही आदिवासी ने उन्हें दिशोंम गुरु की उपाधि से नवाजा.

Advertisement

इस ऐतिहासिक आंदोलन के बाद शिबू सोरेन आदिवासियों के सर्व मान्य नेता बन चुके थे. महाजनी प्रथा के संघर्ष के दौरान जामताड़ा का चिरुड़ीह नरसंहार कांड हुआ था. इस कांड में 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी. जिसमें शिबू सोरेन को बाद में जेल भी जाना पड़ा था.
 

Live TV

Advertisement
Advertisement