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महाराष्ट्रः जानें कौन हैं युगेंद्र पवार जो बारामती सीट पर अजित पवार को देंगे टक्कर

महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को वोटिंग होनी है. सभी पार्टियां उम्मीदवारों के नाम के ऐलान के साथ ही तैयारियों में जुट गई हैं. एक बार फिर बारामती सीट चर्चा के केंद्र में है. क्योंकि यहां मुकाबला चाचा-भतीजे के बीच में होने वाला है.

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बारामती से अजित को चुनौती देंगे भतीजे युगेंद्र.
बारामती से अजित को चुनौती देंगे भतीजे युगेंद्र.

महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को वोटिंग होनी है. सभी पार्टियां उम्मीदवारों के नाम के ऐलान के साथ ही तैयारियों में जुट गई हैं. एक बार फिर बारामती सीट चर्चा के केंद्र में है. क्योंकि यहां मुकाबला चाचा-भतीजे के बीच में होने वाला है. दरअसल, इस सीट पर अजित पवार ने अपने नाम का ऐलान किया था. वहीं शरद पवार ने इस सीट से अब अपने पोते यानी अजित पवार के भतीजे युगेंद्र को उम्मीदवार बनाया है.

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कौन हैं युगेंद्र पवार

युगेंद्र पवार, शरद पवार के पोते और अजित पवार के भाई श्रीनिवास पवार के बेटे हैं. उन्हें शरद पवार ने बारामती से अजित के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा है. युगेंद्र के पास बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी, बोस्टन) में स्नातक की डिग्री है. इससे पहले युगेंद्र को शरद पवार की राजनीतिक रैलियों में देखा गया है. युगेंद्र शरद पवार द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थान विद्या प्रतिष्ठान के कोषाध्यक्ष भी हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान सुप्रिया सुले के चुनाव प्रचार में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी.

यह भी पढ़ें: बारामती में चाचा-भतीजा आमने-सामने, सिटिंग MLAs पर भरोसा... शरद गुट की पहली लिस्ट की बड़ी बातें

बारामती सीट अजित पवार के लिए क्यों है खास

अजित पवार 1993 से बारामती विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं. बारामती विधानसभा बारामती लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. अजित पवार ने 2019 में बारामती विधानसभा सीट पर बीजेपी कैंडिडेट को 165000 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से हराया था. अब उन्हें अपने ही भतीजे युगेंद्र से चुनौती मिलेगी. हालांकि, साल 2024 के लोकसभा चुनाव में अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार बारामती विधानसभा क्षेत्र में 48000 वोटों से पीछे रहीं.

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महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे. नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. अगर पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं. हालांकि, चुनाव के बाद शिवसेना एनडीए से अलग हो गई और उसने एनसीपी-कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली. शिवसेना के उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने.

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