कर्नाटक में तीन विधानसभा उपचुनावों के लिए मतदान 13 नवंबर को समाप्त हो गया और इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों के प्रमुख स्थानीय नेता महाराष्ट्र की ओर कूच कर गए. दरअसल, महाराष्ट्र चुनाव में महायुति और महा विकास अघाड़ी- दोनों ही गठबंधनों का फोकस लिंगायत बेल्ट पर है. इसलिए यहां बीजेपी और कांग्रेस ने कर्नाटक के अपने प्रमुख नेताओं को मैदान में उतारा है. महाराष्ट्र की कुछ विधानसभा सीटों पर लिंगायत बडी संख्या में हैं. शोभापुर, धाराशिव, कोल्हापुर जैसी सीटों पर लिंगायत वोट असरदार है.
कुछ सीटों पर छह से सात प्रतिशत तक लिंगायत मतदाता हैं. बीजेपी ने कर्नाटक के बीस से भी अधिक लिंगायत विधायकों को इन मतदाताओं को अपनी ओर करने की जिम्मेदारी सौंपी है. साथ ही कर्नाटक के बीजेपी सांसदों को भी कर्नाटक से लगे महाराष्ट्र के इलाकों में प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गई है. केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, वी सोमन्ना, सीटी रवि आदि को महाराष्ट्र भेजा गया है. नांदेड़, लातूर, धाराशिव, सोलापुर, सांगली, कोल्हापुर, सिंधुदुर्ग आदि कर्नाटक से लगे हुए इलाकों में बीजेपी ने लिंगायत वोटों पर फोकस किया है.
कर्नाटक में हैं बीजेपी के 30 लिंगायत विधायक
कर्नाटक में बीजेपी की लिंगायत वोटों पर मजबूत पकड़ है. अभी पार्टी के कर्नाटक विधानसभा में तीस लिंगायत एमएलए हैं. हालांकि, बीएस येदियुरप्पा को सीएम पद से हटाने के कारण बीजेपी को लिंगायत समुदाय की नाराजगी झेलनी पड़ी थी. कर्नाटक में 160 से भी अधिक विधानसभा सीटों पर लिंगायत वोटों का असर है और 120 सीटों पर उनकी संख्या 30% से भी अधिक है. कर्नाटक के उद्योग मंत्री एमबी पाटिल को छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंह देव के साथ सोलापुर-पुणे बेल्ट में कांग्रेस के अभियान का प्रबंधन करने के लिए पार्टी द्वारा नियुक्त किया गया है, जिसमें सांगली, कोल्हापुर, उस्मानाबाद, लातूर और नांदेड़ जिलों की पांच दर्जन से अधिक सीटें शामिल हैं.
BJP के लिंगायत नेताओं का मराठवाड़ा में कैंप
सत्तारूढ़ भाजपा ने पूर्व मंत्री भगवंत खुबा के साथ-साथ राज्य के लिंगायत नेताओं अरविंद बेलाड, मुरुगेश निरानी और महेश तेंगिनाकाई सहित उत्तरी कर्नाटक के लिंगायत नेताओं को मराठवाड़ा क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी है. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शोभा करंदलाजे भी इसी इलाके में कैंप करेंगे. कोस्टल कर्नाटक के नेताओं को मुंबई और पुणे में चुनाव प्रचार के लिए लगाया गया है, जहां तटीय और मलनाड आबादी रहती है.
इस साल की शुरुआत में, भाजपा ने लातूर के सबसे बड़े कांग्रेस नेताओं में से एक, शिवराज पाटिल की बहू अर्चना पाटिल चारुरकर को शामिल करके अपने लिंगायत वोट बैंक और और मजबूत करने की कोशिश की. हालांकि, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल कांग्रेस पार्टी में बने हुए हैं, लेकिन अर्चना लातूर (शहर) में पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक अमित देशमुख से मुकाबला कर रही हैं. यहां लिंगायत बनाम मराठा मुकाबला बनता जा रहा है.
कांग्रेस भी लिंगायत समुदाय को लुभाने में जुटी
लिंगायत मतदाताओं को लुभाने के लिए, 2014 में पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने समुदाय की 21 उप-जातियों को अन्य पिछड़ी जातियों और विशेष पिछड़े वर्गों में शामिल किया था. चव्हाण सरकार ने केंद्र से समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा देने की भी सिफारिश की थी. यह मामला केंद्र के पास लंबित है. कर्नाटक से सटे दो अन्य जिलों- नांदेड़ और सांगली का चुनावी समीकरण भी कांग्रेस के एक अन्य दिग्गज नेता, पूर्व सीएम अशोक चव्हाण के भाजपा में जाने से बदल गई है.
महाराष्ट्र के दो बार के मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण के बेटे, अशोक चव्हाण को इस साल की शुरुआत में भाजपा से राज्यसभा नामांकन मिला था. चव्हाण परिवार के समर्थन के बावजूद, भाजपा 2024 के लोकसभा चुनावों में नांदेड़ सीट हार गई. अशोक चव्हाण की बेटी श्रीजया अब भोकर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं, जिस सीट पर भाजपा कभी नहीं जीती है. कांग्रेस को निकटवर्ती सांगली में भी इसी तरह की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जहां पूर्व सीएम वसंतदादा पाटिल के परिवार से जयश्री पाटिल निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरी हैं.
भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में सोलापुर से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे के खिलाफ लिंगायत संत जय सिद्धेश्वर शिवाचार्य को मैदान में उतारकर मराठवाड़ा में लिंगायत वोटों के लिए एक मजबूत पिच बनाई. शिंदे एक लाख से अधिक वोटों से हार गए, आरपीआई नेता प्रकाश अंबेडकर महारों के बीच पारंपरिक कांग्रेस समर्थन को विभाजित करने में कामयाब रहे. जाति प्रमाणपत्र विवाद में फंसे शिवाचार्य (सोलापुर एक आरक्षित सीट है) को भाजपा ने 2024 में टिकट नहीं दिया. कांग्रेस ने सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रणिती शिंदे को यहां से टिकट दिया और जीत दर्ज करने में कामयाब रहीं.