जम्मू-कश्मीर की बारामूला सीट से सांसद इंजीनियर राशिद ने आजतक के खास कार्यक्रम 'पंचायत आजतक' में शिरकत की और कई सवालों के जवाब दिए. उन्होंने उमर अब्दुल्ला के वायरल वीडियो पर कहा कि आज वह एमएलए बनने के लिए टोपी उतार रहे हैं. मुझे उन पर बहुत दया आई. एक तरफ मैं हूं जिसने जेल से चुनाव जीता है.
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'मुझे अपने लोगों पर पूरा भरोसा था'
राशिद से पूछा गया, क्या आपको उम्मीद थी कि आप चुनाव जीतोगे? उन्होंने जवाब दिया, 'मुझे अपने लोगों पर भरोसा था. कुछ लोग कहते हैं कि मुझे सहानुभूति का वोट मिला है. 2019 में भी मैंने सांसद का चुनाव लड़ा था. मैं सिर्फ 24-25 हजार वोटों से हारा. पांच क्षेत्रों में मैंने लीड हासिल कर ली थी लेकिन मेरे क्षेत्र में पोलिंग के दिन एक सोचे-समझे मंसूबे के तहत एक युवक की हत्या करवा दी गई ताकि वोटिंग प्रतिशत कम हो. नहीं तो मैं 2019 में ही संसद पहुंच गया होता.'
'वो तय कर लें कि मैं क्या हूं'
राशिद ने कहा, 'जब मेरे बेटे ने फॉर्म भरा उमर साहब ने कहा कि काश मुझे पहले पता होता, मैं चुनाव लड़ता नहीं. कुछ दिन आगे चले, हम चुनाव जीत गए तो फिर कहा कि ये तो इस्लामिक कट्टरपंथी की जीत है. मैं उनसे कहना चाहता हूं कि मुझे इस्लामिक होने पर गर्व है और कोई भी इस्लामिक कट्टरपंथी नहीं हो सकता. वो पहले तय कर लें कि क्या मैं बीजेपी के साथ हूं, इस्लामिक हूं या कट्टरपंथी हूं.'
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'मुझे उमर अब्दुल्ला पर दया आई'
उन्होंने कहा, 'उमर साहब ने टोपी नीचे उतारकर वोट के लिए भीख मांगी, मुझे उन पर दया आई, बिल्कुल अच्छा नहीं लगा. एक चीफ मिनिस्टर, जिनके पिता दो-तीन बार सीएम रहे, जिनके दादा ने हिंदुस्तान को कश्मीर गिफ्ट कर दिया वो अब एक एमएलए बनने के लिए भीख मांग रहा है. वहीं इंजीनियर राशिद का बेटा और उसके लोग निकलते हैं और जेल से मुझे चुनाव जिताते हैं.'