महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधनों का गणित सेट होने लगा है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाली महायुति में शामिल एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना और अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में सीट शेयरिंग पर बातचीत अंतिम दौर में है. बीजेपी ने 99 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान भी कर दिया है. वहीं, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) में सीट बंटवारे का पेच अब तक नहीं सुलझ सका है. दोनों गठबंधनों में जारी कवायद के बीच अब सूबे के चुनावी रण में एक तीसरे गठबंधन की एंट्री हो गई है.
बीजेपी से राज्यसभा सांसद रहे संभाजी राजे छत्रपति की अगुवाई में हुए इस नए गठबंधन में राजू शेट्टी की पार्टी स्वाभिमानी शेतकारी पक्ष, बच्चू कुडू की अगुवाई वाली प्रहार जनशक्ति पार्टी भी शामिल है. छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज संभाजी ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल और वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) के प्रकाश आंबेडकर को भी इस तीसरे गठबंधन में शामिल होने का न्योता दिया है. उन्होंने ये भी कहा कि दो-दो शिवसेना, दो-दो एनसीपी हैं. इन दोनों पार्टियों के एक-एक गुट सत्ता में हैं और एक-एक गुट विपक्ष में हैं. इससे लोग भ्रमित हैं. महाराष्ट्र की जनता परिवर्ततन के लिए बेचैन है.
यह भी पढ़ें: 99 में 80 सिटिंग MLAs पर जताया भरोसा, बागियों से बनाई दूरी... महाराष्ट्र में बीजेपी की पहली लिस्ट की बड़ी बातें
महाराष्ट्र के चुनावी रण में तीसरे गठबंधन की एंट्री के बाद अब बात इसे लेकर भी होने लगी है कि इससे किसे नफा होगा और किसे नुकसान? संभाजी राजे छत्रपति ने परिवर्तन महाशक्ति के गठन का ऐलान करते हुए यह भी कहा कि चुनाव में किसी की हार सुनिश्चित करने की बजाय हमें अपने उम्मीदवारों की जीत के लिए काम करना चाहिए जिससे विधानसभा में लोगों की चिंताएं उठाई जा सकें. संभाजी जीत के लिए प्रयास करने की बात कह रहे हैं लेकिन तीन कोण बनेंगे तो जाहिर है किसी को इसका लाभ होगा और किसी को नुकसान.
तीसरे कोण से किसे होगा फायदा
परिवर्तन महाशक्ति के गठन ने महायुति और एमवीए, दोनों ही गठबंधनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इस गठबंधन को अगर मनोज जरांगे पाटिल भी समर्थन दे देते हैं, प्रकाश आंबेडकर की पार्टी शामिल हो जाती है तो यह विपक्षी एमवीए के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है. हालिया लोकसभा चुनाव नतीजे देखें तो मराठवाड़ा रीजन की 46 विधानसभा सीटों में से 31 सीटों पर एमवीए की पार्टियों के उम्मीदवार आगे रहे थे. वहीं, किसान नेता राजू शेट्टी का प्रभाव पश्चिम महाराष्ट्र में अधिक है.
यह भी पढ़ें: झारखंड-बिहार से महाराष्ट्र तक 'परिवारों' के खाते में टिकट ही टिकट... हर दल मेहरबान!
पश्चि महाराष्ट्र की बात करें तो हालिया लोकसभा चुनाव में एमवीए और महायुति, दोनों ही गठबंधनों के बीच कांटे की लड़ाई देखने को मिली थी. पश्चिम महाराष्ट्र में 70 विधानसभा सीटें हैं और एमवीए के उम्मीदवार इनमें से 35 सीटों पर आगे रहे थे. महायुति के उम्मीदवार भी 30 सीटों पर बढ़त बनाने में सफल रहे थे. विदर्भ रीजन की सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी की फाइट को ही निर्णायक माना जाता है लेकिन परिवर्तन महाशक्ति की एंट्री से सरकार से नाराज एकमुश्त वोट की उम्मीद लगाए एमवीए की टेंशन बढ़ गई है.