महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनावों से पहले मराठा आरक्षण आंदोलन से सियासी पारा चढ़ गया है. सत्ताधारी महायुति से लेकर विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) तक, मराठा आरक्षण आंदोलन ने राजनीतिक दलों की मुश्किल बढ़ा दी है. मनोज जरांगे की मांगों का समर्थन किया तो ओबीसी के छिटकने का डर और विरोध किया तो कहीं मराठा विरोधी टैग न चिपक जाए, राजनीतिक दल इसे देखते हुए सतर्क हैं. मराठा आरक्षण पर कांग्रेस का स्टैंड क्या है? सूबे में कांग्रेस की अंतिम सरकार के मुख्यमंत्री रहे पृथ्वीराज चव्हाण ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई के मंच पर इसका जवाब दिया है.
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि मराठा समाज के लिए आरक्षण का प्रावधान करने वाला सबसे पहला मुख्यमंत्री मैं ही था. हमने मराठा समाज के लिए 16 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया था. उन्होंने कहा कि ये प्रावधान कोर्ट ने खारिज कर दिया. ये आधार बनाया गया कि इसकी वजह से आरक्षण 50 फीसदी के कैप से अधिक हो जा रहा है. चव्हाण ने कहा कि अगर ऐसा है तो फिर पीएम मोदी ने ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान कैसे कर दिया. कई दूसरे राज्यों में भी आरक्षण इससे ज्यादा है.
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने आरक्षण देने के राज्य सरकारों के अधिकार को ही छीन लिया है. जातिगत जनगणना की मांग को लेकर पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि जातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति देखी जानी चाहिए. जनगणना के लिए पहले ही अधिक देर हो चुकी है. उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना कांग्रेस की पॉलिसी है और इसका कोई विरोध नहीं है. पृथ्वीराज चव्हाण ने कांग्रेस नेतृत्व से नाराज जी-23 ग्रुप के नेताओं को लेकर एक सवाल पर कहा कि ऐसा कुछ नहीं था, कोई जी-23 या जी-24 ग्रुप नहीं था. एक लेटर सोनिया गांधी जी को लिखा गया था जो लीक हो गया और ये मीडिया का दिया टैग है.
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पूर्व सीएम ने कहा कि वीर सावरकर को लेकर एक सवाल पर कहा कि उनके व्यक्तित्व के भी दो पहलू हैं. एक पहलू हम महान नेशनल हीरो, स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद करते हैं. दूसरा पहलू उनका अंडमान की सेल्यूलर जेल वाला चैप्टर भी है. उन्होंने 15 खोखे की सरकार वाले विपक्षी नारे पर कहा कि जनता दुखी है जिस तरह से सब्जी की तरह विधायकों की खरीद-फरोख्त हुई. पूर्व सीएम ने कहा कि विधायकों को 15-15 करोड़ रुपये में खरीदा गया. विधायकों को जनता के बीच इसका जवाब देना होगा.
गलत नीतियों से नहीं आईं इंडस्ट्रीज
पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की गलत नीतियों की वजह से महाराष्ट्र में पिछले 10 साल से कोई इंडस्ट्री नहीं आई है. उन्होंने कहा कि किसानों की आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं. पुणे से 37 आईटी कंपनियां इसलिए चली गईं क्योंकि कनेक्टिविटी ठीक नहीं थी. पूर्व सीएम ने देवेंद्र फडणवीस के आईफोन प्रोडक्शन वाले वादे की याद दिलाते हुए कहा कि 2018 में फडणवीस ने कहा था कि 26 फीसदी आईफोन महाराष्ट्र में बनेंगे. क्या हुआ इस वादे का.
नेताओं के पार्टी छोड़ने पर क्या बोले
पृथ्वीराज चव्हाण ने मिलिंद देवड़ा से लेकर अशोक चव्हाण तक, महाराष्ट्र के बड़े नेताओं के कांग्रेस छोड़ जाने को लेकर सवाल पर कहा कि हमारे कुछ नेता राज्यसभा सीट के लिए पार्टी छोड़ गए. शिवसेना और एनसीपी टूट गई, लेकिन कांग्रेस नहीं टूटी. उन्होंने दावा किया कि किसान भी नाराज हैं और जनता ने हालिया लोकसभा चुनाव में दो गठबंधनों में से एमवीए को चुना था, विधानसभा चुनाव में भी एमवीए को ही चुनेगी.
पृथ्वीराज चव्हाण ने सुशील शिंदे के यूपीए सरकार के समय कश्मीर के हालात और ताजा बदलाव को लेकर बयान पर कहा कि ये उनकी व्यक्तिगत सोच हो सकती है. नितिन गडकरी ने कहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें पीएम बनने का ऑफर मिला था. इसे लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि मैंने तो ऑफर नहीं दिया था. मेरे पास इतनी पावर नहीं है. मैं कौन होता हूं ऑफर करने वाला.