लोकसभा चुनाव में महायुति गठबंधन की हार के बाद अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे का रुख बदला नजर आ रहा है. उन्होंने कुछ ही महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला लिया है.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए को बिना शर्त समर्थन देने के बाद अब महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला लिया है. गुरुवार को मुंबई में पार्टी की मीटिंग में राज ठाकरे ने ये फैसला लिया. उन्होंने मीटिंग में साफ किया कि उनकी पार्टी राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से 225 से 250 सीटों पर लड़ने के लिए तैयारी कर रही है.
इसके साथ ही, राज ठाकरे ने संभावित उम्मीदवारों की पहचान करने के लिए पांच नेताओं की एक टीम भी बनाई है. इतना ही नहीं, राज ठाकरे एक अगस्त से राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने के लिए महाराष्ट्र का दौरा भी शुरू करने जा रहे हैं.
मनसे नेता संदीप देशपांडे ने साफ किया कि वो महायुति गठबंधन के प्रस्ताव का इंतजार नहीं कर सकते. उन्होंने ये भी कहा कि अभी तक बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) के बीच भी अब तक सीट बंटवारे पर कोई सहमति नहीं बन सकी है.
विपक्ष ने ली चुटकी
हालांकि, विपक्षी पार्टियां मनसे के बदले रुख पर चुटकी ले रहे हैं. शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि राज ठाकरे ने लोकसभा चुनाव में एनडीए का समर्थन किया और अब विधानसभा में अकेले उतर रही है. उन्होंने कहा कि मनसे एकमात्र विधायक के दम पर सत्ता में आने की इच्छुक है. ऐसा लगता है कि वो भ्रमित हैं और उन्हें साफ करना चाहिए कि वो असल में क्या कहना चाहते हैं?
इसी बीच, शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक और प्रवक्ता संजय शिरसाट ने कहा कि मनसे को विधानसभा चुनाव महायुति के साथ मिलकर लड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि अभी सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति नहीं बनी है और जब बनेगी तो मनसे को भी प्रस्ताव दिया जाएगा.
कितनी सीटों पर लड़ सकती है महायुति पार्टियां
महाराष्ट्र की 288 सीटों में से सबसे ज्यादा सीटों पर बीजेपी चुनाव लड़ेगी. एनसीपी (एपी) प्रमुख अजित पवार ने 80 से 90 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया है. जबकि, शिवसेना (शिंदे गुट) की लगभग 100 सीटों पर नजर है. वहीं, बीजेपी 160 से 170 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है. इन सबके बीच ही मनसे ने ज्यादा से ज्यादा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है.
अब सवाल ये है कि क्या मनसे का अकेले उतरना बीजेपी और शिंदे के राजनीतिक समीकरण को नुकसान पहुंचा पाएगी. मराठी और हिंदुत्व, तीनों ही पार्टियों का साझा एजेंडा है. ऐसे में मनसे के अकेले उतरने से वोटों का बंटना भी बड़ी परेशानी खड़ा कर सकती है.
महाराष्ट्र में इस साल होने हैं चुनाव
महाराष्ट्र में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. विधानसभा का कार्यकाल इस साल 26 नवंबर को खत्म हो जाएगा. अक्टूबर-नवंबर में यहां की 288 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होंगे.
पिछले चुनाव में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं. हालांकि, चुनाव के बाद शिवसेना एनडीए से अलग हो गई और उसने एनसीपी-कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली. शिवसेना के उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने.
जून 2022 में शिवसेना में आंतरिक कलह हो गई. इसके बाद एकनाथ शिंदे ने पार्टी के 40 विधायकों को तोड़ दिया. एकनाथ शिंदे बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गए. अब शिवसेना दो गुटों में बंट चुकी है. शरद पवार की एनसीपी भी दो गुट- शरद पवार और अजित पवार में बंट गई है. शरद पवार ने हाल में दावा किया है कि महाराष्ट्र में इस साल चुनाव में महाविकास अघाड़ी (एनसीपी (एसपी)+ कांग्रेस+ शिवेसना (ठाकरे गुट)) 225 सीटें जीतेगी.
महाराष्ट्र में लोकसभा में ऐसे रहे नतीजे
महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों के लिए बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और अजित पवार की एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था. हालांकि, 2019 की तुलना में इस बार महाराष्ट्र में एनडीए को काफी नुकसान हुआ है. तीनों पार्टियां मिलकर सिर्फ 19 सीटें ही जीत सकी. इनमें बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुटे) ने 9-9 और अजित पवार की एनसीपी ने 1 सीट पर जीत हासिल की. दूसरी ओर, इंडिया ब्लॉक ने 28 सीटें जीतीं. कांग्रेस ने 13, शरद पवार की एनसीपी ने 8 और शिवसेना (ठाकरे गुट) ने 7 सीटें जीतीं. एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की है.