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हरियाणा की सीट रानिया की जंग... जहां चौटाला फैमिली के दादा-पोता आपस में भिड़ेंगे...

रणजीत सिंह चौटाला ने 2019 के विधानसभा चुनाव में रानिया सीट से जीत हासिल की थी. वे निर्दलीय चुनाव मैदान में थे. इससे पहले रणजीत को रानियां से दो विधानसभा चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा है. रणजीत 1987 के बाद 2019 में 31 साल बाद विधानसभा चुनाव जीते थे.

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हरियाणा की रानिया सीट पर चर्चा में है.
हरियाणा की रानिया सीट पर चर्चा में है.

हरियाणा में विधानसभा चुनाव हैं और यहां सिरसा जिले की रनिया सीट पर सियासी मुकाबला काफी रोचक होने वाला है. इस बार रानिया सीट पर चौटाला फैमिली के दादा-पोता आपस में भिड़ेंगे. इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने पार्टी के वरिष्ठ नेता अभय चौटाला के बेटे अर्जुन चौटाला को रानिया सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया है. सोमवार को इनेलो ने सात उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी की है. अर्जुन पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं. 

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इससे पहले अर्जुन के दादा और चौधरी देवी लाल के तीसरे बेटे रणजीत सिंह चौटाला भी ऐलान कर चुके हैं कि वे रानिया सीट से चुनाव लड़ेंगे. भले ही निर्दलीय उतरना पड़े. ऐसे में यह साफ हो गया है कि विधानसभा चुनाव में भी चौटाला फैमिली के बीच चुनावी मुकाबला देखने को मिलने वाला है.

अर्जुन, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के नाती हैं. जबकि ओम प्रकाश, चौधरी देवी लाल के बड़े बेटे हैं. अर्जुन की पहली पॉलिटिकल फाइट काफी टफ मानी जा रही है, क्योंकि उनके पास अनुभवी और रिश्ते में दादा लगने वाले रणजीत सिंह चौटाला होंगे. लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले रणजीत बीजेपी में शामिल हुए थे और हरियाणा सरकार में ऊर्जा एवं जेल मंत्री हैं. हाल ही में लोकसभा चुनाव में भी हिसार सीट पर चौटाला परिवार में पॉलिटिकल फाइट देखने को मिली थी. रणजीत ने हिसार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन वे कांग्रेस उम्मीदवार जयप्रकाश से चुनाव हार गए थे. इस चुनाव में नैना सिंह चौटाला जेजेपी और सुनैना चौटाला इनेलो के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं. यह सियासी फाइट देवरानी, जेठानी और ससुर के बीच देखने को मिली थी.

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नैना चौटाला दो बार विधायक रही हैं. वे ओम प्रकाश चौटाला के बेटे अजय चौटाला की पत्नी हैं. वहीं रणजीत, अजय चौटाला के चाचा हैं. जबकि सुनैना, ओम प्रकाश चौटाला के दूसरे भाई प्रताप चौटाला के बेटे रवि चौटाला की पत्नी हैं. 

2014 के लोकसभा चुनाव में नैना चौटाला के बेटे दुष्यंत चौटाला ने इनोलो के टिकट पर हिसार सीट पर चुनाव जीता था. हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में दुष्यंत को बीजेपी के बृजेंद्र सिंह ने हरा दिया था.

बीजेपी से टिकट मिलने पर रणजीत ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि उन्होंने राज्य सरकार में बिजली और जेल मंत्री के पद से इस्तीफा नहीं दिया था. इसलिए नियमानुसार वो विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की तारीख 24 मार्च से अगले छह माह के लिए मंत्री बने रहेंगे.

दो बार रानिया से चुनाव हारे रणजीत सिंह चौटाला

रणजीत सिंह चौटाला ने 2019 के विधानसभा चुनाव में रानिया सीट से जीत हासिल की थी. वे निर्दलीय चुनाव मैदान में थे. इससे पहले रणजीत को रानियां सीट पर कांग्रेस के टिकट पर दो बार हार का मुंह देखना पड़ा. 2009 में नए परिसीमन के बाद रणजीत रानियां विधानसभा सीट से लड़े, लेकिन कृष्ण कंबोज से हार गए. 2014 में रामचंद्र कंबोज से चुनाव हार गए. 2019 में कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया तो बागी हो गए और निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल कर ली.

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चौटाला फैमिली का गढ़ मानी जाता है सिरसा

सिरसा जिले को चौटाला परिवार का गढ़ माना जाता है. ऐसे में यहां देवीलाल परिवार के सदस्यों के बीच राजनीतिक टकराव हरियाणा की राजनीति में दिलचस्पी पैदा करता है. वहीं, अर्जुन चौटाला ने 2019 में कुरुक्षेत्र सीट से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा था. ये राजनीति में उनकी एंट्री थी. हालांकि, वो 60,679 वोट पाकर पांचवें नंबर पर आए थे और उनकी जमानत जब्त हो गई थी. इस सीट पर हरियाणा के मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी.

हरियाणा में कुल 90 सीटें हैं. अब तक इनेलो-बसपा गठबंधन ने 14 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. कलायत से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा और लाडवा से शेर सिंह बरशामी को उम्मीदवार बनाया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी लाडवा से बीजेपी के संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं. जबकि कांग्रेस और बीजेपी समेत अन्य सभी दलों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है.

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