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'छोटी लड़ाइयां हारकर ही बड़ी जंग जीती जाती हैं', AAP को मिली शिकस्त के बाद बोले सौरभ भारद्वाज

दिल्ली विधानसभा चुनाव मिली हार के बाद सौरभ भारद्वाज की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी लड़ाइयां हम हारते हैं, बड़ी जंग जीती जाती है. इससे हताश या निराश होने की जरूरत नहीं है. भारद्वाज ने आप कार्यकर्ताओं से कहा कि वे हिम्मत न हारें और भविष्य में वापसी करने के लिए कड़ी मेहनत करते रहें.

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सौरभ भारद्वाज (फाइल फोटो)
सौरभ भारद्वाज (फाइल फोटो)

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं, जिसमें 10 साल से सत्ता में रही AAP को करारी हार मिली है. विधानसभा चुनाव में पार्टी के कई दिग्गज नेता अपनी सीट गंवा चूके हैं. वही साउथ दिल्ली की ग्रेटर कैलाश विधानसभा सीट से उम्मीदवार सौरभ भारद्वाज भी चुनाव हार गए हैं. उन्हें बीजेपी की शिखा रॉय ने हराया है. 

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हार के बाद भारद्वाज की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी लड़ाइयां हम हारते हैं, बड़ी जंग जीती जाती है. इससे हताश या निराश होने की जरूरत नहीं है. भारद्वाज ने आप कार्यकर्ताओं से कहा कि वे हिम्मत न हारें और भविष्य में वापसी करने के लिए कड़ी मेहनत करते रहें. उन्होंने कहा कि मैं आम आदमी पार्टी के सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देना चाहता हूं और उनसे कहना चाहता हूं कि वे डरें नहीं, निराश न हों. 

तीन हजार से अधिक वोट से चुनाव हारे

ग्रेटर कैलाश से सौरभ भारद्वाज लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं. हालांकि शुरुआती रुझानों के दौरान ग्रेटर कैलाश सीट पर कुछ समय के लिए सौरभ भारद्वाज आगे चल थे, लेकिन बाद में बीजेपी की शिखा रॉय ने उन्हें 3,000 से अधिक वोटों से हरा दिया. भारद्वाज इस हार के साथ वरिष्ठ आप नेताओं की सूची में शामिल हो गए, जिनमें अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसौदिया का नाम भी है, ये सबी नेता बीजेपी के हाथों अपना चुनाव हार गए हैं.

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27 साल बाद दिल्ली में BJP की वापसी
दक्षिणी दिल्ली का ग्रेटर कैलाश निर्वाचन क्षेत्र 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा की प्रमुख सीटों में से एक है. चुनाव की तैयारी में बीजेपी ने शिखा रॉय को आप नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ मैदान में उतारा था. चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी 27 साल के लंबे वनवास के बाद दिल्ली की सत्ता में लौट गई है, जबकि AAP राजधानी में चुनावी जीत की हैट्रिक बनाने में विफल रही है. खंडित जनादेश के बाद अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी ने पहली बार 2013 में कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार बनाई थी.

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