यूपी की नौ विधानसभा सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रचार की बागडोर संभाल रखी है तो वहीं विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर से पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव मोर्चे पर हैं. सीएम योगी बनाम अखिलेश हो चुकी उपचुनाव की इस लड़ाई में बात शिवपाल यादव को लेकर भी हो रही है. कभी सपा में टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार तक, अग्रिम मोर्चे पर नजर आने वाले शिवपाल यादव की इन उपचुनावों में क्या भूमिका है? चर्चा इस बात को लेकर भी हो रही है.
इस तरह की चर्चाएं बेवजह भी नहीं हैं. दरअसल, सपा ने उपचुनाव के लिए 19 स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की थी. इस लिस्ट में शिवपाल का नाम छठे नंबर पर था. सपा समर्थकों को उम्मीद थी कि नौ ही सीटों की बात है. ऐसे में शिवपाल हर सीट पर रैली करेंगे. उपचुनाव के लिए प्रचार अब अंतिम चरण में है. चुनाव प्रचार के लिए अब तीन दिन का ही समय बचा है. कुछ सीटों पर तो शिवपाल ने ताबड़तोड़ रैलियां की भी हैं लेकिन हर सीट पर उनके कार्यक्रम नहीं हो सके हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि शिवपाल कहां हैं?
शिवपाल के सामने कटेहरी सीट बचाने की चुनौती
सपा ने इन उपचुनावों में शिवपाल यादव को कटेहरी विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया है. कटेहरी विधानसभा सीट के चुनावी अतीत की बात करें तो इस सीट पर साल 1991 से अब तक हुए चुनावों में एक बार बीजेपी और दो बार सपा को जीत मिली है. तीन चुनाव छोड़ दें तो हर बार इस सीट पर हाथी दौड़ा है. यूपी चुनाव 1991 में बीजेपी के अनिल तिवारी, 1993 में बसपा के रामदेव वर्मा, 1996 से 2007 तक लगातार तीन बार बसपा के धर्मराज निषाद विधायक रहे. चार चुनाव से चला आ रहा बसपा का विजयरथ 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने रोक दिया था.
यूपी चुनाव 2012 में सपा के शंखलाल मांझी जीते थे लेकिन 2017 में यह सीट लालजी वर्मा ने फिर से बसपा की झोली में डाल दी. 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले लालजी वर्मा बसपा छोड़ सपा में शामिल हो गए और चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने में भी सफल रहे. लालजी वर्मा को लोकसभा चुनाव में सपा ने अंबेडकरनगर सीट से टिकट दिया था और वे जीते भी.
लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद लालजी वर्मा ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. सपा विधायक के सांसद बन जाने से रिक्त हुई कटेहरी सीट पर बीजेपी-बसपा की मजबूत किलेबंदी को भेद फिर से साइकिल दौड़ाने की कोशिश में अखिलेश यादव की पार्टी ने शिवपाल यादव जैसे दिग्गज नेता को प्रभारी की जिम्मेदारी सौंप रखी है.
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शिवपाल यादव कटेहरी में ताबड़तोड़ रैलियों के जरिये सपा उम्मीदवार के पक्ष में माहौल बनाए रखने की कोशिश के साथ ही नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ भी लगातार संवाद के जरिये बूथ लेवल तैयारियों पर भी नजर रख रहे हैं. कटेहरी ऐसी सीट है जहां एक छोटे वोटबैंक का छिटकना भी चुनावी गणित बिगाड़ सकता है और बीजेपी ने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को इस सीट का प्रभारी बनाया है.
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सीएम योगी ने भी अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट के साथ कटेहरी को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ रखा है. ऐसे में सपा ने किसी तरह का रिस्क लेने की जगह शिवपाल जैसे संगठन के मंझे हुए नेता को बतौर प्रभारी कटेहरी के रण में उतार दिया. कटेहरी की लड़ाई सपा बनाम बीजेपी से ज्यादा दोनों पार्टियों के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों यानि शिवपाल बनाम स्वतंत्र देव मानी जा रही है.
सपा नेताओं-कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश
कटेहरी में 1991 के यूपी चुनाव के बाद से अब तक कमल नहीं खिल सका है. इस ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए बीजेपी ने इस सीट पर जिस तरह से जोर लगाया, सीएम योगी से लेकर स्वतंत्र देव सिंह तक ने जिस तरह सक्रिय हुए, सपा की टेंशन बढ़ गई. सपा ने इस सीट से लालजी वर्मा के परिवार से ही शोभावती वर्मा को उम्मीदवार बनाया है, ऐसे में एक आशंका टिकट के दावेदार नेताओं की बगावत का भी था. शिवपाल की इमेज ऐसे नेता की है जिसका कार्यकर्ताओं से सीधा जुड़ाव रहता है. शिवपाल ने कटेहरी में कैंप भी किया.
करहल में यादव वोटों का भी है दारोमदार
सपा के लिए इन नौ सीटों में करहल की चुनावी लड़ाई भी प्रतिष्ठापरक हो गई है. करहल सीट पर सपा से तेजप्रताप यादव मैदान में हैं तो वहीं बीजेपी ने उनके सामने मुलायम फैमिली के दामाद अनुजेश यादव को प्रत्याशी बनाया है. परिवार के सदस्य और रिश्तेदार की इस फाइट में दारोमदार यादव वोटों पर है. सपा जीत सुनिश्चित करने के लिए यादव वोट सहेजने की जुगत में जुटी है.
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करहल में भी पार्टी ने शिवपाल को आगे किया. शिवपाल यादव तेज प्रताप के नामांकन में शामिल हुए ही, करहल में कैंप कर चुनाव प्रचार भी किया. सपा ने नाक का सवाल बन चुके नौ विधानसभा सीटों के उपचुनाव में शिवपाल को रणनीति के तहत उन सीटों पर अधिक फोकस्ड रखा है जहां पार्टी की कोशिश हर हाल में जीत की है.