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हरियाणा की कुर्सी यहीं से हुई तय... वो 13 सीटें जहां 5 हजार वोटों से पीछे थी कांग्रेस!

हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए बहुमत का आंकड़ा 46 है. बीजेपी को 48 सीटों पर जीत मिली जबकि कांग्रेस 37 सीटें ही जीत सकी. कांटे के मुकाबले में 13 सीटें निर्णायक साबित हुईं, जहां मतगणना के दौरान दोपहर तक कांग्रेस पांच हजार या इससे कम वोट के अंतर से पीछे चल रही थी.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (Image Source: META AI)
प्रतीकात्मक तस्वीर (Image Source: META AI)

हरियाणा चुनाव में 48 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है. विपक्षी कांग्रेस इस बार भी विपक्ष में ही रह गई और पार्टी 37 सीटें ही जीत सकी. बीजेपी और कांग्रेस की सीटों में 11 का अंतर है और सूबे की 13 सीटें ऐसी रहीं, जिन्होंने मतगणना के दौरान सबका ध्यान खींचा. कांटे के मुकाबले वाली इन सीटों पर दोपहर तक कांग्रेस पार्टी पांच हजार या इससे कम वोटों से पीछे चल रही थी. जब नतीजे आए तो निर्णायक मानी जा रहीं इन 13 में से कुछ सीटें हाथ के साथ आईं तो कुछ पर कमल खिला. वो सीटें कौन सी हैं?

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इन 13 सीटों पर थी सबकी नजर...

चुनाव आयोग के अनुसार, मंगलवार दोपहर 12.53 बजे तक पंचकूला सीट पर कांग्रेस  2532 वोटों से पीछे चल रही थी. हालांकि, परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहे और पार्टी के चंदर मोहन ने बीजेपी के ज्ञान चंद गुप्ता को 1997 वोटों से हरा दिया. 

रादौर सीट पर कांग्रेस 4075 वोटों से पीछे रही थी, लेकिन शाम होते होते बीजेपी उम्मीदवार श्याम सिंह राणा ने कांग्रेस के बिसनलाल सैनी को 13 हजार 132 वोटों से पराजित कर दिया. 

इंद्री सीट पर कांग्रेस 2324 वोटों से पीछे थी, मगर बीजेपी के रामकुमार कश्यप ने 15 हजार 149 वोटों से कांग्रेस के राकेश कंबोज को परास्त कर दिया.  

असंध सीट पर कांग्रेस करीब 3178 वोटों से पिछड़ रही थी, मगर देर शाम तक पार्टी के उम्मीदवार शमशेर सिंह गोगी अपने प्रतिद्वंदी बीजेपी प्रत्याशी योगिंदर सिंह राणा से 2306 वोटों से हार गए.   

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राई सीट पर कांग्रेस 1215 वोटों से पीछे थी. लेकिन बीजेपी की कृष्णा अहलावत ने बढ़त बनाई और फिर कांग्रेस उम्मीदवार जय भगवान को 4673 मतों से हरा दिया. 

नरवाना सीट पर कांग्रेस 2529 वोटों से पीछे चल रही थी, मगर फिर पार्टी के प्रत्याशी सतबीर को बीजेपी के कृष्ण कुमार से 11 हजार 499 वोटों से हारना पड़ा. 

वहीं, फतेहाबाद सीट पर कांग्रेस 1318 वोटों से पिछड़ रही थी, लेकिन बाद में पार्टी उम्मीदवार बलवान सिंह दौलतपुरिया ने बढ़त बनाई और बीजेपी के दूरा राम को 2252 वोटों से परास्त कर दिया.  

इसी तरह आदमपुर सीट पर कांग्रेस 4185 वोटों से पीछे थी, मगर कांटे की टक्कर में पार्टी के उम्मीदवार चंदर प्रकाश ने बीजेपी के भव्य बिश्नोई को 1268 वोटों से हरा दिया. 

बदरा सीट पर कांग्रेस 3592 वोटों से पिछड़ रही थी, फिर पार्टी पिछड़ती चली गई और उम्मीदवार सोमवीर सिंह को बीजेपी के प्रत्याशी उमेद सिंह के मुकाबले 7585 मतों से हार का स्वाद चखना पड़ा. 

दादरी सीट पर कांग्रेस 4642 वोटों से पीछे थी और बढ़त नहीं बना सकी. इस सीट पर सुनील सतपाल सांगवान ने कांग्रेस की मनीषा सांगवान को 1957 वोटों से परास्त किया. 

भवानी खेड़ा सीट पर भी कांग्रेस 3587 वोटों से पीछे चल रही थी. आगे हुई मतगणना में पार्टी के उम्मीदवार प्रदीप नरवाल को बीजेपी के कपूर सिंह ने 21 हजार 779 वोटों से शिकस्त दी.  

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कलानौर सीट पर कांग्रेस 1178 वोटों से पीछे थी, मगर पार्टी प्रत्याशी शकुंतला खटक ने बढ़त बनाते हुए बीजेपी की रेणु डाबला को 12 हजार 232 मतों से पराजित कर दिया. 
   
हुड्डा ने किया था सरकार बनाने का दावा 

हरियाणा में मतगणना के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दावा किया था कि कि उनकी पार्टी हरियाणा में अपने दम पर सरकार बनाने जा रही है. पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने रोहतक में पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस को 'बहुमत मिलेगा.' यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी को सरकार बनाने के लिए किसी समर्थन की आवश्यकता होगी, उन्होंने बड़े विश्वास के साथ कहा था कि कांग्रेस अपने दम पर सरकार बनाएगी.

हुड्डा ने तो राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को कांग्रेस की जीत का श्रेय तक दे दिया था. लेकिन जब अंतिम नतीजे आए, बीजेपी इतिहास रचते हुए 10 साल की एंटी इनकम्बेंसी की दीवार भेद लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत का आंकड़ा छू लिया था. गौरतलब है कि हरियाणा की 90 सीटों पर 464 निर्दलीय और 101 महिलाओं समेत कुल 1,031 उम्मीदवार मैदान में थे. सभी सीटों के लिए 5 अक्टूबर को एक ही चरण में मतदान हुआ था. 

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