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कुमारी सैलजा, मुख्यमंत्री पद और... Exit Poll में कांग्रेस को बढ़त पर क्या बोले दीपेंद्र हुड्डा

हरियाणा में कांग्रेस जीती तो सीएम कौन बनेगा, इस सवाल के जवाब में दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस का एक सिस्टम रहा है कि जब कांग्रेस को जनादेश मिलता है तो पार्टी प्रजातांत्रिक तरीके से फैसला लेती है. इसमें कांग्रेस हाईकमान का आखिरी फैसला होता है. शीर्ष नेतृत्व की ओर से ऑब्जर्वर नियुक्त किए जाते हैं. जो विधायकों से मिलते हैं उनकी भावनाएं जानते हैं, वह अपनी बात केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाते हैं. इसके बाद हाईकमान फैसला लेता है.

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दीपेंद्र हुड्डा
दीपेंद्र हुड्डा

रोहतक से लोकसभा सांसद और कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने आजतक से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा. साथ ही कुमारी सैलजा, एग्जिट पोल को लेकर भी बात की. दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि बीजेपी के 10 साल के नेतृत्व में हरियाणा विकास और खुशहाली की पटरी से उतर गया है. बीजेपी ने हरियाणा में जाति और धर्म के आधार पर हरियाणा की जनता में आपसी भेदभाव कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास किया था, जबकि जनता के लिए कोई काम नहीं किया. इसलिए हरियाणा अब बेरोजगारी और करप्शन में नंबर वन बन चुका है.

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कांग्रेस नेता ने कहा कि पूरे हरियाणा से हमारे पास जो रिपोर्ट आ रही है, वह C Voter के Exit Poll की दिशा में ही आ रही है कि हर वर्ग ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया है, यहां मजबूती से कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है. 

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क्या हरियाणा में बीजेपी को लेकर एंटी इन्कंबेंसी है? इस सवाल पर दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि एंटी इन्कंबेंसी के बहुत कारण हैं. बीजेपी ने गरीबों की सारी योजनाएं बंद कर दीं, शहरों की हालत बदहाल है. उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार को हरियाणा की जनता ने विफल सरकार माना, इसलिए बीजेपी को चुनाव से पहले अपने सीएम को हटाना पड़ा. 

कुमारी सैलजा को लेकर दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा की मजबूती में सभी नेताओं का योगदान है. इसमें सैलजा जी भी शामिल हैं. इसके साथ ही  सभी कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है कि सूबे में कांग्रेस मजबूत संगठन के रूप में उभरकर सामने आई है. 

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हरियाणा में कांग्रेस जीती तो सीएम कौन बनेगा, इस सवाल के जवाब में दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस का एक सिस्टम रहा है कि जब कांग्रेस को जनादेश मिलता है तो पार्टी प्रजातांत्रिक तरीके से फैसला लेती है. इसमें कांग्रेस हाईकमान का आखिरी फैसला होता है. शीर्ष नेतृत्व की ओर से ऑब्जर्वर नियुक्त किए जाते हैं. जो विधायकों से मिलते हैं उनकी भावनाएं जानते हैं, वह अपनी बात केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाते हैं. इसके बाद हाईकमान फैसला लेता है. 

सी-वोटर के एग्जिट पोल के मुताबिक हरियाणा में बीजेपी को 20 से 28, कांग्रेस 50 से 58, जेजेपी 0-2 और अन्य को 10 से 14 सीटें मिल सकती हैं. हालांकि चुनावी नतीजे 8 अक्टूबर को आएंगे, तभी ये साफ होगा कि हरियाणा में अगले 5 साल कौन राज करेंगा.
 

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