पश्चिम बंगाल में चुनावी युद्ध की रणभेरी तो बज ही चुकी है. अब बंगाल में वादों की डुगडुगी भी सुनाई देने लगी है. टीएमसी के बाद बीजेपी ने भी अपना चुनावी पिटारा खोल दिया है. कोलकाता में अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी ने रविवार को बंगाल में परिवर्तन के नारे के साथ अपना संकल्प जारी कर दिया है. अमित शाह ने बीजेपी का चुनावी घोषणा पत्र 'सोनार बांग्ला संकल्प पत्र' जारी किया. अमित शाह ने कहा कि घोषणापत्र सोनार बांग्ला को मू्र्त रुप देने का संकल्प है. जनता की अपेक्षा के अनुरुप संकल्प पत्र बनाया गया है. आइए जानते हैं कि बीजेपी और टीएमसी के चुनावी घोषणापत्र में क्या फर्क है...
दरअसल, बीजेपी ने अपना संकल्प पत्र जारी करते हुए वादों का पिटारा खोल दिया. इन वादों में बंगाल में परिवर्तन वाली पॉलिटिक्स का दावा है और झलक भी. लेकिन बंगाल चुनाव के लिए बीजेपी के इस संकल्प पत्र में जो बात सबसे अहम बात है वो है हिंदुत्व वाली राजनीति का रोडमैप, जिसके दम बीजेपी बंगाल के वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही है.
बीजेपी ने अपने सोनार बांग्ला संकल्प पत्र से ये साफ जाहिर कर दिया है कि पार्टी बंगाल में विकास और हिंदुत्व वाली राजनीति को साथ लेकर आगे बढ़ेगी. बीजेपी ने बंगाल के लिए बड़े वादे ही नहीं बल्कि इस संकल्प पत्र के जरिये ममता बनर्जी की एक-एक घोषणाओं का भी जवाब देने की कोशिश की है.
17 मार्च को ममता बनर्जी ने 146 पन्नों के अपने मेनिफेस्टो में पिछले 10 साल की उपलब्धियां गिनाईं, कई वादे भी किए. ममता मां कैटीन चला रही हैं. बीजेपी अन्नपूर्णा कैंटीन चलाएगी.
ममता ने विधवा पेंशन 1000 रुपये देने का वादा किया. बीजेपी ने 3000 रुपये देने का. ममता ने ओबीसी में महेश, तामुल तिलि, शाहा को आरक्षण देने का वादा किया.
टीएमसी ने छोटे किसानों को प्रति एकड़ 10 हज़ार रुपये सालाना रकम देने का ऐलान किया है. बीजेपी ने भी किसानों को 10 हजार रुपए देने की बात कही है.
ममता ने ओबीसी, दलित और आदिवासी परिवार को साल के 12 हज़ार रुपये ट्रांसफर करने का वादा किया है. बीजेपी ने दलित और पिछड़े वर्ग की छात्राओं को 3 से 5 हजार तक आर्थिक मदद देने की घोषणा की है.
ममता कह रही हैं कि छात्रों को क्रेडिट कार्ड देंगी, बीजेपी कह रही है कि छात्राओं की पढ़ाई फ्री होगी.
ममता का 25 लाख घर बनाने और हर घर-साफ पानी का वादा है. बीजेपी ने 11 हजार करोड़ का सोनार बांग्ला फंड बनाने का ऐलान किया है.