बंगाल के चुनावों में एक से बढ़कर एक ड्रामे देखने को मिल रहे हैं. यहां एक लीडर जब चुनावी कैंपेन करने के लिए अपने इलाके में गए तो 'गो बैक' के नारे से उनका स्वागत हुआ. इतना ही नहीं, जब वह वहां एक दुकान पर बैठकर गए तो उस जगह को गंगाजल छिड़ककर 'शुद्धिकरण' किया गया. (नॉर्थ 24 परगना से दीपक देबनाथ की रिपोर्ट)
यह मामला नॉर्थ 24 परगना जिले हाबरा म्यूनिसिपैलिटी इलाके का है जहां बंगाल बीजेपी के सीनियर लीडर राहुल सिन्हा वोट मांगने के लिए मंगलवार सुबह गए.
हाबरा विधानसभा क्षेत्र में राहुल सिन्हा सुबह चाय पीने आए तो वह कंजरवैंसी डिपार्टमेंट पर वोट मांगने गए. वहां पर कॉन्ट्रैक्चुअल काम करने वाले वर्कर बाहर आए और नारेबाजी करने लगे. इतने में वह बहुत सारी पुलिस फोर्स और आरएएफ की टीम पहुंच गई जिन्होंने स्थिति को संभाला.
उसके बाद जब राहुल सिन्हा वहां से चले गए तो ऑफिस के क्लीनिंग स्टॉफ ने उस जगह को गंगा के पानी और फिनाइल से साफ किया. यहां तक कि जिस चाय की दुकान पर बैठकर चाय पी, वहां भी गंगाजल छिड़ककर 'शुद्धिकरण' किया गया.
राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया कि सफाईकर्मी अपनी नौकरी छोड़कर उनके साथ पार्टी का काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अस्थायी कर्मचारी नारे लगा रहे थे. वे काम पर जाने वाले हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल पार्टी के काम के लिए किया जा रहा है. यह स्पष्ट है कि नगरपालिका का काम ठीक नहीं चल रहा है और पूरे संस्थान का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है.
राहुल सिन्हा ने अस्थायी सफाईकर्मियों द्वारा उठाए गए "गो बैक" नारे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मैं सुबह 6.10 बजे यहां आया. उन्होंने सुबह 8.30 बजे नारा लगाना शुरू किया. मैं प्रचार करने के लिए 5 मिनट में किसी अन्य क्षेत्र में चला गया.
दूसरी ओर, हाबरा नगर पालिका के सफाई कर्मचारी भोला सेन ने कहा कि कोरोना और अम्फान चक्रवात के दौरान हमने इन नेताओं को घर से बाहर निकलते नहीं देखा. वे घर के अंदर बैठे थे. लॉकडाउन के दौरान हमने अपनी नौकरी खो दी और मुसीबत में पड़ गए. उस समय तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा विधायक ज्योतिप्रिया मलिक ने हमारे घरों में भोजन पहुंचाया. आज केवल राहुल सिन्हा ही वोट और प्रचार के लिए यहां आए लेकिन हम उनका समर्थन नहीं करते हैं. इसीलिए उन्होंने गंगा जल से पूरे कार्यालय की सफाई की और फिनाइल से फर्श को साफ किया.